ससितोत्पलमालिन्

ससितोत्पलमालिन्
ससितोत्पलमालिन् /sasitotpala-mālin/ (/sa-sita + utpala-/ ) увенчанный (белыми) цветами лотоса




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लक्ष्मी, गार्द्ध्य, कृषी, प्रपलायिन्, रसन, अनुनद्, व्यालमृग, श्रीमन्त्, परिवृद्धि, स्पर्शिन्, एव, तर्क, संप्रनश्, अर्वन्, आशास्य, निमन्त्रण, सासुसू, अनुमद्, परोऽवरम्, आमूलम्, सोपान, तृणोदक, कूर्म, विलोक्, प्रोल्लस्, दीर्घकाल, शाम्ब, कुशूल, वह्निमय, षडंह्रि, दाश, निःक्षत्रिय, असद्ग्रह, श्वेतवत्सा, प्रतिवच्, झंकार, समानयन, तार्किक, सयोनि, लिप्, अभितस्, मित्रधेय, व्रज्, हिताहित, सौविद, षड्रात्र, रूपवन्त्, इयन्त्, संसिच्, यथायथम्, °परिच्छद्, हिरण्यनिर्णिज्, दीक्षा, प्रसच्, प्रकर्ष, परिविन्न, सानुग, स्फेयण्स्, विशुन्य, सप्रसव, जग्धि, प्रतिमोक्षण, प्रतिषिध्, लघुता, सूचि, भीर, वधना, गीर्वाण, , शीघ्रता, स्वर्गति, °द, इष्, वर्षपात, यज्ञ, मुद्राराक्षस, मधूद्यान, सप्तरश्मि, सर्वसत्य, वामलोचना, गन्धक, उदक, जघन्यज, अपोह, प्रशाखा, प्रचयन, गृहस्थता, नदनिमन्, विद्वेषिता, पीताम्बर, नीललोहित, निर्जीवकरण, मैथुन्य, मेदस्वन्त्, सौश्रवस, निसञ्ज्, सावलेप, पञ्चशाख, प्रतिबाहू, प्रागुण्य, युग्मन्त्, कीदृग्रूप, जर्जरित, जडांशु, गुर्जर, कलापसूत्र, प्रतिसंहर्, त्रिषष्ति, आचार्य, धनुर्धर, पर्कटी, ऋते, सशिरस्, स्तोक, गृहजन, समता, उत्कीर्ण, जयन्ती, नेक्षण, वल्क, संवेष्ट्, विक्रेतर्, उदीक्ष्, प्रतिहाराय, तितिक्ष्, राजसेवा, शून, स्थूल-शरीर, श्ली-पद, उन्माद, बत, विकुण्ठ, रसज्ञा, अपधाव्, इन्द्रवज्रा, निहा, सपत्नक्षयण, कृच्छ्रकाल, निर्माय, शब्दिन्, दुर्मद, मुखेन्दु, सुरथ, सीताद्रव्या, नदृश्य, नदीतट, , विषवन्त्, गुप्, वसुर, निरम्, वडभि, निर्वासन, अविनीत, करकिसलय, लुब्धक, परिसाध्य्, महा°, अश्वा, उदाहर्, व्युत्थान, द्यौर्लोक, अन्तर्धापय्, आसिच्, परिणति, वसुधार, गगन, सौबल, पानीयवर्ष, पक्षवन्त्, मदकल, धान्यवन्त्, मध्यमजात, प्रत्यनीक, परिस्खल्, अनुभू, पण-स्त्री, सत्योक्ति, प्रियहित, राजभृत्य, तृषा, उपजन्, सः, द्विस्वर, वार्योकस्, जातरूपमय, प्रवृत्त, उत्प्रास, मालतीमाधव, निपीड्, यमुना, कृतज्ञ, दावानल, संमाननीय, पद्मावती, नमय्, वलिभ, अभीक, अष्टासप्तति, उपहर्, क्षाम्, हवनश्रुत्, लुठ्, वाञ्छ्, प्रष्टर्, वशकर, षष्ठी




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