विख्यापन

विख्यापन
विख्यापन /vikhyāpana/ n. оповещение, объявление; обнародование




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घटिका, यत्, श्रद्धिन्, सुहव, सप्तपद, भास्मन, हारुक, संवृत्, धुर्, नैघण्टुक, सांग्रामिक, पार्थिवर्षभ, प्रियङ्गु, गृहजन, मुखशशिन्, समस्थ, द्राघियंस्, आधिवेदनिक, दित, आवर्, विश्रावय्, समभिपद्, ओषधि, मेथि, पदस्थ, प्रभृथ, विप्रश्न, संबोधय्, चतुर्थ, कुक्षि, सर्व, स्नेहल, सलिलज, दुर्लभत्व, स्वरु, विगम, सृप्, उज्झ्, कारू, मातृष्वसेयी, शठमति, विसंधि, ज्रि, परिया, चकोर, पेलव, पितृतस्, बलिमन्त्, सितदीधिति, तैल, त्रिपथ, श्रोत्र, पतिघ्नी, सुकृतकृत्, हस्त, कन्दली, प्रस्रव, पापकारिन्, कश, विधि, राजदर्शन, प्रियता, मघत्ति, प्रपातन, क्षत, दशविध, वर्ष्य, प्रयत्, शयालु, मुदित, दृष्टिपात, परिशोषिन्, वृद्धवयस्, समालम्भ, अद्वैत, विशेषक, कुन्त, समिष्टि, सहता, खल, सत्पुत्र, प्रस्तारिन्, प्रतिजुष्, दिशा, छाग, राजकीय, विवादपद, प्रद्रव, विटप, परोऽक्ष, दुर्विपाक, अयातयाम, शैलशृङ्ग, अङ्क्, अवचि, सूकरी, उपेन्द्रवज्रा, अवीर्य, उच्छेत्तर्, सुकृतकर्मन्, अनय, मल्ली, रक्तक, सप्तकृत्वम्, दण्डोपनत, मारण, अस्रिध्, वैश्य, प्रतिज्ञा, समास, इतर, स्तवथ, पाजस्, काश्यप, विपरीत, अत्रिन्, विद्राविन्, वेला, यथेच्छ, समुपक्रम्, मीद्वंस्, हेमव्याकरण, पारिपन्थिक, मिथ्यावचन, सर्ववर्ण, आश्वत्थ, समुन्मील्, परिषद्, फट्, शात, न्युभ्, निरनुक्रोश, वस्त्राञ्चल, वार्त्त, फलप्रद, धूपिन्, बुक्का, युग, वेणुयव, पटिष्ठ, महन्त्, मालविकाग्निमित्र, सुकृत, लम्बन, आचमन, दुष्प्रकृति, समातन्, परिकीर्तन, अभिगमन, ब्राह्मणघ्न, नामशेष, कोक्कोलक, पुरूरवस्, हस्तप्रद, वाणी, प्रणिपतन, तैमिरिक, वैराग्य, द्रव्यजात, मृद्वङ्ग, कर्पर, गय, मेचक, जनमेजय, असादृश्य, ब्रह्मरक्षस्, प्राची, नाट्याचार्यक, सामीप्य, पाथोनिधि, विधर्षय्, कवक, नमन, ओदन, नमस्य, जीवक, जागरूक, प्रत्यादा, अस्रिधान, ओह, चर्मज, द्विता, सप्तविंशतितम, हृषीकेश्वर, नाट, व्रज्, धर्मेन्द्र, तुरण, विद्यावन्त्, पुलह, बृहद्रवस्, लौल्य, आयुध, आरब्ध, संभ्रंश्, स्थिरचित्त, मुष्टिहन्, खस, गोष्ठी, मन्या, फल, आश्रयभूत, सुतीर्थ, नीलाश्मन्, धर्महन्तर्, दैवपरायण, रुशती




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