सर्वोपरम

सर्वोपरम
सर्वोपरम /sarvoparama/ (/sarva + uparama/) m. прекращение всякого существования, абсолютный покой

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प्रथमक, अतिदाह, अयास्, हस्, वल्लरि, मन्मथानल, कम्बुग्रीव, मिथस्, धन्वन्, अपभञ्ज्, विनेय, समुपे, प्रकृतिष्ठ, सदेव, निर्वेष्टव्य, कुटि, अंह्रि, मांसखण्ड, जू, श्रान्त, कल्हार, विनिर्दग्ध, मातुल, शमवन्त्, स्नायुस्पन्द, हिंसारु, तिग्मरश्मि, निःसंज्ञ, सुदुःखित, स्त्रीप्रसू, वावात, अनर्ह, निमीलिन्, असत्यसंध, गुदज, दीक्षापाल, एकानर्थ, अप्रबुद्ध, तरिणी, प्रसभम्, आलपित, वधूटिका, अगुण, हस्तपाद, प्रतिज्ञा, कदर्थ, मस्तिष्क, अश्, सानाथ्य, सविषाद, प्रमन्यु, सिता, प्रमृश, परिमिताहार, खोट, उपमेयोपमा, स्तिया, देशकालज्ञ, गोनासा, गोरक्ष्य, मथिन्, उपचिय, सहास्या, शरद्घन, नटन, वशगत, महानिद्र, कोकी, मन्दर, ऊर्म्य, जीवातु, विराट, नवसप्तति, दुर्जाति, दून, शुद्धहृदय, भारवाहन, विनियुज्, पाण्डुलेख, समुपयुज्, दृषदुपल, मूर्तिमन्त्, त्रिजत, नविष्टि, अग्नायी, शक्मन्, सायाहन्, लुङ्, रसवत्ता, प्राड्विवाक, निरामिष, रम्भ, नीलाम्भोज, धर्माधिकृत, नृपकार्य, गारुड, शीत-दीधिति, प्रयाचन, नारकीय, दुर्गन्ध, अग्रज, निमीलिका, धराधर, महाप्रभु, विसर्ज्, सुन्दर, निभालन, नृतू, जारवृत्तान्त, मध्यमक, पिङ्गाक्ष, परा, जूर्णि, हव, ऊह, वाताहति, केरल, दीर्घ, अभिसर्ज्, आततायिन्, ज्योतिःशास्त्र, नशन, कषण, सा, स्थापन, धायस्, प्रज्ञावन्त्, प्ररोह, द्युति, क्षामि, स्कम्भन, उपवेद, डिल्लि, उपासन, नन्तर्, नागान्तक, नभीत, क्षुरिक, प्रपथिन्, सुनाभ, वेश्य, दिव्, सितमनस्, रथ्य, इच्छु, निषेवितर्, सामगान, क्षय, नवविध, दर्शत, सुसंस्कृत, पस्त्या, बल, पुत्रवती, तौल्य, भैक्षाशिन्, समन्ततस्, मुखमारुत, कुलिशभृत्, दुवस्वन्त्, हविर्मथि, वल, अलेपक, दुष्, हृदयज्ञ, प्रतिगमन, पुष्, हरिद्रा, आशौच, प्रत्याशा, शीतांशु, अमर्त, ज्ञानयुत, मङ्गल्य, रङ्गद्वार, त्रुटि, अप्रमत्त, प्रतिसंवद्, महापथ, झम्प, मुखर, सुतरण, परिचर्या, जैह्म्य, ब्लेष्क, सर्वकामिन्, चापल, भासक, दान, संसर्जन, जिगीषा, वीर, सोमवंश, तोयधर, विश्वायु, याच्ञ्य, कोटि, घातनी, उपदेश, पुष्पक, मुक्तासन, सत्ता, लिपिकर, स्पर्धा, गतजीव, सृमर, प्राग्दक्षिणा







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