अप्यूह्

अप्यूह्
अप्यूह् /apyūh/ (формы см. ऊह् II) понимать; воспринимать




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परास्, अह्रुत, शरभ, नक्षत्रेश, विदूषक, स्वपन, मसूर, महाभय, प्रमुक्ति, हृदयकम्पन, एकपद, द्विज, आटोप, यदर्थ, निर्धन्त्व, मातर्, विनिद्र, शकृत्, उत्कम्पन, °शय्य, आनन्द, धनर्चि, प्रमनस्, शान्तत्व, आह्वय, सुष्टुति, लावक, विन्ध्यवन, गुणोत्कर्स, कच, विष्ठा, स्पश्, प्रातर्यज्ञ, व्यालम्ब, व्यालम्बिन्, मन्थ, अग्रयायिन्, गन्धवह, वेहत्, अदन, महेश, दीप्तिमन्त्, शतसेय, त्रिजत, वह, इन्दुबिम्ब, क्षुप, दीर्घदर्शिन्, राष्ट्रि, सर्वज्ञानमय, दिविष्टि, संभाषण, लीलावन्त्, व्यवहर्, वसुंधर, परिजन, मयस्, अधिष्ठित, नर्म, देहिन्, पक्षिराज्, निबर्हण, शुभंयु, लोकज्ञ, महादुःख, मिथ्योपचार, नरलोक, मतिमन्त्, लिङ्ग, समराङ्गन, अनुपपन्न, क्रमेलक, जार, शुष्मय, जल्पाक, रजनीश, निगुह्, स्मत्, घातक, रजनीमुख, विवेकित्व, अवसादय्, त्रिदिवौकस्, ऊर्ध्वगामिन्, अन्तर्धि, जनस्, विलोकन, उत्स्ना, दुर्वृत्त, द्वानवति, संचर, प्ररोचन, प्रावृत, वृषन्, रोग, प्रियदर्शन, भिक्षाभाण्ड, संनाह, प्रत्यङ्कम्, कामपूर, विनियुज्, वितत, नैसर्गिक, वीथि, जलस्नान, प्रतीड्, कैलास, पदार्थ, दिव्यत्व, वप्, कषण, कमलाकर, नासामूल, अकृत्य, पताकिनी, एकोत्तर, घनपदवी, विलेपिन्, सिद्धिकर, द्विरुक्त, तिग्मेषु, प्रव्रजित, पार्वती, ऋभु, स्कन्धदेश, अतिवृद्धि, धर्मक्षेत्र, निवर्तिन्, जयश्री, °उपानह, शुरुध्, घटना, उत्था, विनिर्गम, अभीष्, कर्ष्, प्रयात, मञ्जूषा, प्राक्कर्मन्, सावेगम्, उपस्पर्शिन्, मीमांसक, गुहाहित, पत्त्रारुढ, अपाज्, शताश्रि, विश्वविद्, व्युच्छेद, चाटुकार, प्रपा, भद्राह, रन्ध्र, अनड्वाही, सारफल्गुत्व, अनुवाक, निरन्न, कप, खोर, सराग, पराश्रय, धूम्रक, दृष्टिक्षेप, शिरसिज, अनुविली, दत्त्रिम, महासाध्वी, दर्, उत्तम्भ्, संपादयितर्, महित्व, विधाव्, नरेन्द्रता, प्लक्ष, जूर्णि, हेमकन्दल, निटिल, सूत्र, चतुर्वय, शतोति, पित्त, सुखार्थिन्, निर्गम, आरिच्, नु, कुञ्चि, झर्झर, दीर्घश्रवस्, मूढता, धनार्त्हिन्, यदा, रघुनाथ, यथापूर्व, पङ्क्तिक्रम, उतो, अभिजन्, सिद्धलक्ष, सोमयाज्ञिन्, दून, °वृन्तक, कुरुपाण्डव, गर्भता, आश्रमस्थान, क्षेमयोग, वज्र, विष्, उपमारय्, स्पन्दित, नयुत
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