स्वविशय

स्वविशय
स्वविशय /sva-viśaya/ m. своя страна; свой дом




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उपायोपेय, वर्ध्र, अमिवा, समनुगम्, मैत्र, सुप्तप्रबुद्ध, नवभाग, संददि, यमसदन, नक्षत्रराज, अभाग्य, सुदुःसह, क्षीज्, पृतनाषह्, बलसमूह, नेत्रान्त, वार, प्रचल, उत्कर्ण, अध्वन्य, स्वच्छ, रहय्, विमहस्, सूवरी, देवतुमुल, एकतर, श्मील्, पञ्चदश, आसक्ति, कर्, स्नुस्, उपोष्, प्रस्तारिन्, सर्व, प्रसादक, द्विजादि, धन्वन्, जालक, सेविन्, कण, अवयवरूपक, अध्याक्रम्, पर्यवस्त्हापय्, शाखामृग, तुल्यार्थ, निपुणता, मनीषित, कुमारिलभट्ट, लक्षा, मांसादिन्, अनुदात्त, प्रसत्त, धरापति, सुयाम, संरोह, जम्भ, विनिपात, शाठ्य, नियम, °लुञ्चक, मृज्, द्यूतसमाज, भद्रत्व, मुद्ग, संस्थ, अभ्यागमन, महावसु, समुल्लिख्, प्राप्ति, त्र्यह, तक्षण, निरन्धस्, अतिदाह, अज्ञान, अनुरम्, कुलज, होमकाल, , स्मर्तर्, आदित्यपुराण, क्लम, शस्त्रपद, वसन्त, वृक्षमय, दुर्मद, काम्य, वागुरा, विधवता, शौल्किक, कटुकित, धर्मरूचि, त्रिवर्ष, रक्तिमन्त्, सुदृढ, चतुरश्र, धान्यपञ्चक, सेवा, प्रजवन, असमुद्यम, याम्य, सहस्थित, श्रत्रिय, प्रथमक, मुकुलितनयन, संज्ञिन्, भक्त, अङ्गुरीयक, नयशालिन्, कण्ठभूषण, अन्, संहार, निमीलन, किंमात्र, सीरवाह, अङ्गी कर्, आधर्, सोपहास, निर्घोष, औदार्य, लीन, तृष्ट, विण्मूत्र, भगीरथ, विभीषण, अपरी, सिचय, वाग्मिन्, मन्थर, पिञ्जर, प्रहूति, स्तम्भक, सरसी, यशस्, घनपदवी, समदेश, दुर्निमित्त, यद्वत्, नरायण, चापल, अङ्गना, समद, शीकर, पाटलिमन्, बकार, भू, क्षौम, स्राक्त्य, वैशाख, प्रामोदिक, स्मर्, महन्त्, वैरूप्य, प्राणसार, आहर्तर्, कासार, सहकारिन्, सजाल, पियाल, सप्तरश्मि, प्रतिपण्य, खल्वाट, निरुत्सुक, पुनर्भार्या, पोतर्, सकण्टक, स्तनतट, उपाविश्, दक्षिणामुख, उपविश्, विबाध्, धनस्वामिन्, प्रतिवद्, प्रहाणि, दल्, सूत्र, उदीरय्, दाडिमपुष्प, द्रप्सिन्, ग्रन्थन, जान, परिहृति, हिरण्यशीर्षन्, रज्जु, जुटिका, प्रस्तर्, मिथःसमय, ब्रू, पाठिन्, मृगी, धारावर्ष, वसिष्ठ, गणशस्, जग्धि, श्रेयंस्, सापेक्षत्व, स्रक्ति, षडून, उत्थ, प्रत्ये, व्यत्यय, मशक, श्ली-पद, पतंग, अधःस्थ, शक्तिधर, भूति, विकृष्ट
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