साहित्यदर्पण

साहित्यदर्पण
साहित्यदर्पण /sāhitya-darpaṇa/ n. «Зеркало поэзии» — назв. произведения, относящегося к XV в.




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पथिकसार्थ, धात्रेयी, सर्वायुस्, बीजपूरक, अप्रधृष्य, मधुप्सरस्, प्रसवितर्, कल्, बन्दिन्, अविक्षत, उद्भिद्, ईर्मा, राजता, विशुद्धि, सार, कर्पट, बृहत्पलाश, प्रतिजन्य, रजनी, अंशकल्पना, रसितर्, दधिवन्त्, मूत्र, घनसमय, मानवी, भुक्तवन्त्, नैकधा, अभिद्रुह्, शिरोभुषण, मुष्टि, कपि, ज्ञास्, चापगुण, जातरूपमय, विपाटल, विशोषिन्, द्रुह्, पृथुलौजस्, षत्व, प्रगा, भाष्, आस्कन्दन, राजार्थ, रचन, औत्क्य, द्वादशाह, प्रमनस्, विचय, प्लु, सौशील्य, आबद्ध, निःस्फुर्, वधर्, ताम्बूल, स्वाध्याय, धावय्, रोपक, कर्तन, अधर्म्य, हिन्दु, आदा, कास, शिलास्तम्भ, वशानुग, पूर्णचन्द्र, मनायी, युगल, ययाति, निःस्पृह, प्रसक्त, दृढिकार, सीताद्रव्या, आरम्भ, रणप्रिय, °शंसिन्, दातृत्व, दातृता, प्रतिरस्, निःस्व, चित्रफलकगत, परिमर्द्, दक्षिणेतर, क्षञ्ज्, मुक्ताफल, द्व्यर्थ, निगडय, संबय्, उपकल्पय्, उरण, आराध, सुखाय, समुद्धत, प्रणीताप्रणयन, प्रतिनिवर्त्, उद्रिन्, ऋण, , पलाण्डु, शमल, नाथ, इव, द्वारका, माहेयी, रन्धन, ऊर्जस्विन्, ओकस्, निर्मलता, ऋघावन्त्, सौजन्य, कूलंकषा, बर्ह्, विमुख, नारायण, भवानी, अनन्विष्यन्त्, व्याकुल, परिहि, सत्त्वोत्कर्ष, दक्षपितर्, उकिहिन्, पादरजस्, अमन्तु, वैरित्व, निकामतस्, समुत्सारण, निष्पदय्, आनीत, बीजिन्, गणन, परिलुड्, शस्त, स्ति, अस्तमय, तरस्विन्, तिर्यग्योन, अत्याहित, भूर्, निर्वैर, संमार्जनी, एकस्तम्भ, प्रथ्, राजतनया, ब्रह्मविद्, दात्यूह, सात, संपीड्, कलीयक, ऐकार्थ्य, प्राध्व, अपमार्ग, अतिथिन्, रसराज, सौहृद्य, जाल्म, मृगीदृश्, धाराश्रु, झणत्कार, सहीयंस्, वर्तन, प्रलू, षडंश, अवसादन, वस्त्रवन्त्, अशुभ, दर्मन्, निष्क्रमण, दुर्गसिंही, उत्तरधर, परिभव, बालघ्न, वाग्विदग्ध, कार्य, वैखानस, मरुत्, समुद्यम, क्षम्, संपात, गरीयस्त्व, नेजन, ब्रह्मसव, प्रतियोध, तनीयंस्, रास्ना, मध्यदेश, नौवाह, तमोभूत, उपजीवन, शिवपुराण, कृत्यवन्त्, ते, ऐषीक, नस्, अधिसर्, व्रणय, वंशवर्धन, धवलता, गवाक्ष, निराकाङ्क्ष, भर्गस्वन्त्, अवतार, नेपाल, गुरुदक्षिणा, प्रतिपुस्तक, त्वरित, कर्पण, उत्तम्, प्रसि




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