संबोधन

संबोधन
संबोधन /saṁbodhana/
1. пробуждающий
2. n.
1) пробуждение
2) познание
3) напоминание




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°संश्रयिन्, नैकटिक, जागर्, हत्ताध्यक्ष, रीति, दुष्पार, आश्रमवासिन्, पात, असाधुदर्शिन्, भर, शर, समुन्नम्, आव्रज्, निर्वैरिण, तृणजलूका, खलु, अभ्यवहर्, अलाबु, हव्याद, जम्भकविद्या, अदण्ड्य, दुर्विभाव, सृष्टि, तलातल, भूस्थ, विस्फुर्, इमौ, कङ्कपत्त्र, प्रौढोक्ति, वेष्क, वेतसवृत्ति, पार्श्वपरिवर्तिन्, धृष्टकेतु, मौनिन्, निपतन, उमा, परवश, द्रप्सिन्, अभिसंपादय्, निर्व्याकुलता, प्रस्नु, पर्विणी, प्रशुच्, घर्म, दितिज, व्युत्थान, अमिनन्त्, अश्रवण, गोधा, संविद्, जन्य, पण्य, श्रथ्, धर्मलोप, स्थापक, विष, सुरत, एषण, तरु, वारिधारा, प्रतोली, समुत्पद्, वर्षाहू, निणिक, मूढचेतस्, निस्वनित, प्रीतिमन्त्, शैलूष, निनी, सामग, ध्वनि, घोट, न्यूनाधिक, युति, आक्रन्दन, प्रव्रज्या, दुरुत्तर, अच्, हत्या, वाजिनीवन्त्, भस्मराशीकर्, शीत-रुच्, शर्कराल, वेद्धर्, प्रसू, सत्यत्व, अद्वयत्व, परिवर्तय्, गरुत्, घर्ष्, स्वःस्त्री, भोग, उदीच्य, अमरोपम, विशाखदत्त, पाण्डु, प्रतियामिनि, गृहु, दन्तिन्, उष्णकर, भुज्, ह्मल्, कुंश्, चिताधूम, समुपगम्, परिणाह, आपूरण, शीर्ण, अनुशुष्, सद्गुण, वासवदिश्, पूर्वथा, वृन्दीयंस्, असंनिधान, कार्यवृत्तान्त, पर्शान, शस्मन्, औत्कण्ठ्य, सयावन्, अवरज, उपयुज्य, मिहिका, शतसहस्रधा, उदीर्य, सुदुःसह, प्रत्युपपन्नमति, साकेत, विंशति, परिगाढ, विनिश्वास, रिङ्गि, दांपत्य, वीक्षित, परिचारक, कृष्ट, मुद्रण, पुर-वासिन्, हर्षवर्धन, चलाचल, उच्चत्व, सापेक्षत्व, ह्रेषिन्, बृंहण, परेप्राण, वार्त्त, गुरुगृह, श्वोवसिय, जनमेजय, पेचक, फलद, ङकार, मृगदृश्, अग्निहोत्र, यूथिका, अम्बा, °दंसु, इतस्, अभिदास्, विघ्नजित्, शाङ्ख्य, महावसु, कारणात्मन्, शुच्, सरोगता, शठता, आपीत, मसृण, रत्नाकर, निर्वृक्ष, प्रसर्, परीक्षक, तेजोमय, पृथिवीमय, याजक, सहाय, पुरुध, दशशतकरधारिन्, पूर्णयौवन, शिरोदुःख, प्राणहारक, प्रध्वंस, सुषखि, स्थल, अनुज्ञा, दृष्टिगोचर, पदवी, अधमर्ण, यावद्धा, प्रचय, तनु, नालिका, चिरक्रमेण, निर्धू, निस्वप्, उत्कर्ण, कर्कट, विकत्था, अव्यापार, द्युनिश्, अपगम्, शिक्षक, याम्य, माविलम्बम्, समुपागम्, आलुप्, त्रय, मन्मथ




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