संप्रवर्त्

संप्रवर्त्
संप्रवर्त् /saṁpravart/ (формы см. वर्त् )
1) выходить, выступать из (Abl. )
2) возникать
3) начинать, приниматься за (Dat., Loc. )
4) относиться к (Loc. )




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यतव्रत, याम, उपस्ति, दोहस्, उपत्यका, निक्वण, ब्रह्मपथ, विजृम्भित, मोक्तर्, गोपथ, निर्वेद, श्याल, सर्तर्, अनृक्षर, उक्ति, तिग्मायुध, महीक्षित्, गतपार, तूर्णि, उभ्, प्रसारिन्, उद्योग, दीप्र, प्रविमुच्, अक्ष्, व्यत्यय, उष्टर्, तया, क्षमत्व, धर्मशील, बह्वादिन्, कर्षक, पदार्थ, प्रवास, अपराजित, दायाद, विवध, नैशित्य, अर्चिष्मन्त्, अकरण, धातुहन्, ऋध्, पीति, मैत्रेय, उत्पतन, परशुराम, दक्षिणावन्त्, विनिमेष, मलिनिमन्, तर्द्, वर्ण, अविष्या, शरीरक, नास्तिक्य, शठ्, प्रतिषेधात्मक, बिसवती, पर्णोटज, प्राणहर, समभितस्, पृतन, कादम्बर, शास्त्रकार, मथः, अनन्त्य, नवति, प्रलीन, शष्कुली, उद्घोष, प्रतीप, नखाङ्क, वीरसू, महादेव, नाय, अचिन्तनीय, विचेष्टा, कुवलय, रतिरस, विह्रुत्, अतिच्छन्दस्, निरुक्ति, भौजिष्य, नेत्रपिण्ड, पारुष्य, सद्गुण, मात्रा, श्याम, प्रदीर्घ, आध्र, सहस्रधार, सप्तवार्षिक, अक्षहृदय, संजिति, उपास्था, निषत्ति, विप्रमुक्त, परीणाह, दुर्दैव, उपसृष्ट, नन्द, नहि, विवास्य, पह्नव, शस्त, हरायतन, संज्ञित, तादात्म्य, सान्त्वन, अगार, उलप, निर्वा, अविशेष, उपावर्त्, युद्धभूमि, आसात्, तद्विध्य, अभ्युत्था, विमाथ, अवश, हेठ्, कृत्वरी, निष्प्रज्ञ, वल, विवाक, पवि, सुरथ, क्लिद्, वध, प्रसह्य, साध्वसाधु, मनुर्हित, अतन्द्र, परीष्, तमोघ्न, विक्रयिन्, वर्णमात्र, दर्श्य, लोकत्रय, जूर्णि, पञ्चर्च, तमोभूत, हयप्रिय, रुत, घ्राणा, लुलाप, अष्टनवति, स्तम्बिन्, पारतन्त्र्य, अलम्, निश्चेतस्, भिषज्य, सुकर, मध्वक, चूत, पतत्रिराज, मेघकाल, शरीरज, बाष्पासार, गुप्ति, लष्, मुर्च्छ्, ऊति, उस्रिय, हिरण्यकार, घनसमय, पुण्ड्र, यम्, उज्जेष, दुर्दम्य, शेषभाव, श्वाजिन, द्यू, हरिश्री, मुर, जगतीतल, शुक्ल, ह्रेष्, विद्विष्, वृद्धयोषित्, मीमांसा, विषघ्न, पल्ली, अनुपत्, निःसू, आरक्षा, बालिश, पतिव्रता, वैपुल्य, शन्ताति, भाल, अङ्घ्रि, कूर्द, प्रधावन, तक्, अधरतस्, क्षेत्र, प्रसभ°, गुरुवास, जल, विशसन, पूतदक्ष, लोकायत, परिवाद, शिवमार्ग, वनश्वन्, कलहंस, दुर्वार्यत




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