प्रियसुहृद्

प्रियसुहृद्
प्रियसुहृद् /priya-suhṛd/ m. милый друг




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दीपमालिका, पोष्यपुत्रक, कांस्य, शम, ऊकार, उपक्रुश्, राघव, शष्प, संनर्त्, अवसद्, कुण्डल, पुत्रपौत्रिन्, वयस्य, पेषण, श्लीपदप्रभव, परिवर्धन, पुस्तक, देहकर्तर्, दुश्चरित, अधीशता, बन्धपाश, हेडस्, ज्ञीप्सा, प्रथमा, सार्वभौम, शताङ्ग, प्रमहस्, इज्या, तोयधर, पादभाग, प्रतिभुज्, पठक, स्फाय्, परिमर्श, प्राक्कर्मन्, हय-मेध, संपादय्, सहस्रद, अक्षय, शीघ्रवाहिन्, गताध्वन्, प्रधानपुरुष, निर्मुच्, जंहस्, प्रत्यक्ष, अवस्तु, निर्मनुज, विश्पति, चलात्मन्, अङ्ग्, आसर्ज्, कर्हि, रश्मिमन्त्, वशीकृति, स्तुप, निगरण, त्रिवन्धुर, पी, विधुर, वलि, पराश्रय, वर्षारात्रि, दुर्लभवर्धन, कुधी, मधुकृत्, अविद्ध, पिञ्जरिक, कार, प्रतिहार्द्, स्थिरमति, शिखावल, प्रावृट्काल, व्याकरण, त्रिपक्ष, प्रकाशक, निश्, निःशल्य, गिरिधातु, मायाविन्, जीवितनाथ, बाह्वृच्य, दंशुक, वेणुयष्टि, कामसूत्र, नैराश्य, विहास, सरोष, सर्वदेव, सहोदर, गन्ध, शक्वर, नभ्य, प्रश्रयवन्त्, डात्कृति, वस्तु, निलिप्, भक्षिवन्, भ्रंशन, कनकरस, प्रवर्, घृतपृष्ठ, सपङ्कज, हला, प्राणयुत, असमाप्त, नीति, अनुव्रज्, यत्नतस्, छदन, प्रयुत, विश्वसनीय, वृक्ण, पायु, अपहा, पट्टक, वरतनु, श्रुत्कर्ण, शोधक, पौराण, निर्मातर्, राज्यसुख, अधिष्ठा, भ्रम्, दिव्याकृति, स्नायु, व्रतादेशन, शाकटायन, काव्यकर्तर्, जालमाला, दोष, दाहुक, शैक्य, काञ्चनमय, सुख, वसुमती, वेशत्व, संस्तव, त्रैगुण्य, विद्रा, आत्मनातृतीय, अस्ता, पस्त्या, दुष्टशोणित, कल्पक, शूर्पणखा, ब्लेष्क, शिष्ट, रिषण्यु, इन्द्रता, प्रतिबन्धक, द्विपायिन्, स्पर्ध्, उज्ज्रम्भ्, पृथिवीपति, बाणासन, प्रयोक्तव्य, भुजग, समनुमन्, भग्यक्रम, विजित, अभिताप, सूक्ति, पुल्कस, प्रलम्ब्, स्थापक, अपगुह्, सारमेय, शारीर, धान्यकूट, सहिष्ट, पाजस्, दीर्घसत्त्र, दान्त, रत्नभूत, प्रजाव्यापार, अतिजीव्, नयविद्, नोत्, शुक्ली भू, पुलस्त्य, ज्यैष्ठ, मुदा, लतागृह, प्रमृष्ट, यज्, इतरथा, समीपत्व, अष्टासप्तति, नाविन्, जङ्घा, रामायण, ह्लाद्, प्रजव, वर्तक, रुह्, खट्वा, गातु, प्ररुज्, लिश्, ब्राह्मणभोजन, सुचक्र, प्रगृह्य, मन्त्रपुस्तिका, तनुत्राण, मधुव्रत, परिवत्सर, पातिन्




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