प्रत्युपहार

प्रत्युपहार
प्रत्युपहार /pratyupahāra/ m.
1) восстановление
2) возвращение
3) возмещение (убытков)




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निरास्वाद, लोककृत्, सुत्वन्, °रजस्क, स्नु, विजामन्, परीवाह, विधर्तर्, निवर्हण, ईर, प्रश्चोतन, विक्षेप, मृत्युभय, लुप्, क्षयकर, ज्वरित, विनिपात, मत्स्याद, उपसंव्रज्, वृषन्, ऊह्, अभिवल्ग्, प्रसृति, वेदफल, समावाय, सहिष्णु, समानिचय, षाडव, क्षयाधि, दुर्भेद्य, षडर्च, बहुरूप, धवित्र, परिमन्थर, अयोध्य, स्तिपा, असांप्रत, दैवचिन्तक, सर्पविनाशन, खचर, नाक्षत्र, वध्, तुषार, परिस्पन्द, स्थेमन्, संपर्च्, सव्यापार, ईर्ष्यालु, उशिज्, प्रहर्स, कृष्णभूम, निघ्नक, वामनपुराण, उत्सर्प्, मधुरभाषिन्, चोरक, प्रबोधक, दशार्ह, तेजोमय, ऋग्मिय, गारुड, तृणराज्, नृतु, पारिकर्मिक, वाजवन्त्, कनीनक, संग्रथ्, आता, अभिसंभू, व्युद्, संपत्, मृग, दोषल, शान्तरूप, कीर, अभिसंहित, तदन्त, त्सर्, शठबुद्धि, जिहीर्षु, पारक्य, मुद्, वृत्तसंपन्न, शीरी, शुचिस्मित, लक्ष्य, विनिमय, मक्षू, कुत्स्, वर्ध्मन्, द्युति, विधू, पोताधान, अर्वन्, फेन, नागेन्द्र, वीतिहोत्र, अर्थशास्त्र, संग, जीवत्पति, वर्षोपल, यथाप्रप्त, उपचि, व्रतस्नात, जलशायिन्, नट्, शृङ्गार, भट्टाचार्य, पञ्चनवति, दौष्यन्ति, त्रिंशत्, नृपान्यत्व, सनद्रयि, कृकवाकु, सूत, अनधिगत, अतितपस्विन्, पञ्च-मास्य, विष्वग्गमनवन्त्, आपित्व, छेलिका, अभिवर्ध्, गोण, परिवर्जनीय, अदय, वल्कवासस्, शपन, मैथुन्य, सुतपा, वैद्युत, श्लेष्मन्, मृध, पात्रस्थ, शीत-रुच्, वाल्गुद, नैज, सश्रीक, विप्रदुह्, दम्भोलिपातय, निर्जीवित, पार्ष्णिग्रह, गुरुकार्य, वृक्षशाखा, माहेयी, सुषखि, दुराप, लता, जनि, बीज, आरोहिन्, द्रुघण, महानदी, कार, भविन्, अयोध्या, वनोपप्लव, महापार्श्व, सभस्मन्, नाग, नड्वला, अव्यक्त, साधुत्व, लताटिक, धन्वन्तर, गिरिवासिन्, अप्रसन्न, प्रार्थनीय, चौरी, तुर, °पर्व, सौनिक, उपशुभ्, अतिकृत, धूममय, गोमेध, तेजिष्ठ, पुष्कस, विवादार्थिन्, प्रतिनिवृत्ति, सिव्, मुञ्जमय, वेणुविदल, अस्त्र, तात्, त्रिपुरुष, शर्कर, पल्लव, नीकाश, सदो°, संवत्सरीण, संवद्, अयस्मय, मनस्मय, प्रेत्य, त्रिदिवौकस्, उपराग, विनय, पञ्चविंशतितम, दण्डभाज्, पूर्णमुष्टि, अर्णस्, घातिन्, प्रारोह, अव्युच्छिन्न, प्रवक्तव्य, अनतीत, नृवराह
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