धर्

धर्
धर् /dhar/ (U. pr. /dharati/ / /dharate/—I; fut. /dhariṣyati/ / /dhariṣyate/; pf. /dadhāra/ / /dadhre/; aor. /adhārṣīt/ / /adhṛta/; pp. /dhṛta/)
1) держать
2) нести
3) укреплять
4) сохранять
5) утверждать, отстаивать
6) продолжать
7) удерживать, задерживать
8) сопротивляться, противостоять
9) переносить, терпеть
10) иметь; обладать
11) хранить; содержать
12) быть должным кому-л. (Dat., Gen.) что-л. (Acc. )
13) цитировать




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औत्क्य, सानुक्रोश, क्षितिपति, निःश्रीक, दलनी, विहर्तर्, सद्योमृत, पञ्चदशत्, सितकमल, शद्, नन्तर्, धार्मिकत्व, लोभन, मृक्ष, भक्षितर्, संगुप्ति, विभावय्, निशाकर, अष्टपाद, भावुक, अमा, कृत्स्नत्व, वाग्मिता, दक्षिणत्व, उपयमन, त्वष्टर्, महित्व, आकरिक, परिसर, शून्य, पयस्विनी, सितिमन्, दक्षिण्य, कर्मार, अग्रहस्त, सावमर्द, वात्या, क्ष्विद्, परावह, शव्, तर्पणी, चर्चन, विष्णु, विश्रम्भिन्, सरित्सुत, पार्ष्णिग्रह, रतिबन्धु, लावण्यमय, सञ्जन, उत्तप्, विष्टम्भन, संशप्, दस्युहन्, परिवर्ध्, °वंशज, कतर, गर्धिन्, उपशुष्, प्रजाति, चूडा, पन्था, ह्रदिनी, दशम, व्यालग्राह, अनोकह, सुसमिद्ध, प्रासह, सर्पिस्, निकर्त्, नाष्ट्रा, अर्थविद्, कषण, प्रकाश्, वस्तु, क्षारलवण, पुरावृत्त, समयव्यभिचारिन्, वेणुविदल, समारब्ध, आशुक्लान्त, बुभूषा, संह्राद, सिद्धार्थमानिन्, निर्वाहय्, अमृता, विभङ्ग, हविष्°, रत्नवन्त्, प्रशंसन, अपिबन्ध्, दत्त्रिम, विक्लवत्व, प्राक्शस्, ऋक्वन्, स्तेन, रोष, विषमवृत्त, कोकी, अत्रभवती, महीध्र, ऐतरेय, प्रश्निन्, नरकस्थ, सत्तम, दान, संद्रु, कृतवसति, गतासु, व्यस्, रथवर्त्मन्, आन, संभर्, शूलिन्, अभियाच्, संवर्णन, पात, जडात्मन्, ज्वलन, गृहरक्षा, वर्चस्वन्त्, त्रैस्रोतस, मातलिसारथि, दक्षिणाप्रत्यञ्च्, प्रार्थन, खण्डशस्, तति, आवलि, राजकुल, नडक, वारण, वयोऽधिक, काञ्चनगिरी, लुञ्चन, अध्यवसायिन्, मौलिमालिका, हेष्, व्याव्यध्, कनिष्ठ, आहव, किरीटिन्, दण्डपात, कङ्क्, समस्थ, सशब्द, व्याप्त, संवन्द्, भी, दिवित्मन्त्, गभस्ति, पतिव्रत, उपवेद, प्रेष्या, अदास, अपरित्यक्त, विनिश्चर्, दत्तदृष्टि, नियुत, अवलुड्, अक्षौहिणीपति, दीनचित्त, नवर्च, ननु, मल्लिनाथ, वर्तमानकाल, क्षितितल, उपया, कृष्णाजिन, अब्धि, समुद्रयान, अस्माकम्, सुभ्रू, अमृत, विशद, स्वस्तिदा, ब्रह्मयुज्, पौत्र, प्राग्दक्षिणा, विज्वर, प्रतिनन्दन, अनुनासिक, नखपद, अमत्सर, त्र्यक्ष, प्रलम्बिन्, वेश, शुक, विदर्शित, मेघज्योति, परोऽक्ष, ज्योत्स्नी, सुबहु, सद्वृत्ति, दीर्घश्रवस्, प्रियबन्धु, मिथु, शिक्वस्, प्रतिमुहूर्तम्, प्रतीक, मन्युमोक्ष, वनर्गु, कृच्छ्रता, लोकप, षड्विंश, तुषारकर, सर्ववीर, निबिडय, परिणाम
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