तर्प्

तर्प्
तर्प् /tarp/ (P. pr. /tpyati/ — IV; fut. /tar-piṣyati/, /tarpsyati/, /trapsyati/; pf. /tatarpa/; aor. /atṛpat/, /atarpīt/ a/tra_psa_t, /atārpsīt/; pp. /tṛpta/; inf. /tarpitum/, /tarptum/, /trap-tum/)
1) насыщаться, удовлетворяться
2) довольствоваться чем.-л. (Abl. )




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द्वैत, महि, तूलिनी, सहलोकधातु, अनुमति, द्विपद्, औक्ष, वैवश्य, एवमाद्य, नीरद, मर्म°, सुहस्त्य, धूलिध्वज, अधिक, डिण्डिमा, प्रशुच्, पटीक्षेप, संक्षेपतस्, वर्गस्थ, दुर्लेख्य, कैलास, सूति, परिग्रहण, संकाश, आत्मानपेक्ष, द्विजाति, प्रस्तर, जयकृत्, अभिशस्ति, आति, पतिघातिनी, विक्रिया, अष्टपञ्चाशत्, हिमालयसुता, पञ्चरात्र, हविष्कर्, प्रत्ययसर्ग, शलाका, कृत्नु, अविघ्न, स्नानगृह, शकृत्, अवसेक, याच्य, देष्ण, ध्यानस्थित, तत्त्वभूत, शकुर, सोद्योग, तीरज, पशव्य, प्रताप, सैंह, एकादशम, संलप्, संस्तव, अनर्चित, मद्यप, अनभ्र, युगशरम्, गुणान्वित, संलुभ्, क्रीत, शकुन्ति, प्रसुप्, ब्रह्मवन्त्, सामान्य, परिपूति, राजविद्या, निरन्धस्, अश्विनी, स्पर्श्, शकृत्, रचन, परुषवादिन्, रोमक, आर्यमिश्र, प्राक्तस्, मेह, अत्युपचार, आपा, सौशील्य, रत्निन्, जैत्र, पूर्व, वर्णसंसर्ग, घर्मवन्त्, प्राग्जन्मन्, यव, स्त्रीप्रसू, निष्पुरुष, विमुच, दी, वारिमय, पृष्ठदेश, अवलोक्, दापनीय, अपगुह्, महीन्द्रेन्द्र, दर्शनविषय, रोमण्वन्त्, सैक, काञ्चन, सर्वभूतकृत्, सितमणि, श्रोत्र, कश, ज्ञानशक्तिमन्त्, साभिकाम, सुनासिक, रोहित, अग्रिय, द्रोहभाव, अमण्डित, शब्दापय्, विच्छित्ति, सप्तविंशत्, उपस्तम्भन, सामानाधिकरण्य, वैलक्ष्य, विज्ञाति, वधोपाय, मत्क, तोय, अवचक्ष्, अविशद, पनय्, जार, धौर्त्य, पुरी, प्रत्यायक, दम, संन्यस्, सूपकर्तर्, सापेक्षता, अनुअहम्, संप्रतिपत्ति, तत्सख, भिदुर, अतिरुष्, निर्लिप्, राजकन्यका, प्रचल, शप्, सूर्य, निर्घोष, मधूत्सव, शुद्धसत्त्व, प्रत्यह, आसेवन, मृत्युकाल, विहायस्, आशुया, संधर्षय्, वेदविद्, आसन्नवर्तिन्, प्रसङ्गवन्त्, विमथ्, अपहर्, क्ल्+प्ति, हिन्व्, दक्षिणत्व, नग्नक, सराजन्, अभिक्रुध्, चन्द्रगुप्त, प्रसू, पाद्य, संनिपात, हिडिम्ब, वङ्क्रि, विचर्, विहृत, पूर्वाशा, आरुह्, रत्नच्छाया, निमिष्, अभिविमा, दुर्ग्रह, संयोग, लोकवृत्तान्त, गोत्र, पाथोद, अनीति, सर्म, जीवसर्वस्व, वसिष्ठ, आलेख्यसमर्पित, महामनस्, मन्तु, जकार, शिशिरदीधिति, विनुद्, वनदेवता, चित, श्वाशुर, शैलराज, प्रतीनाह, संवृद्धि, कर्दम, निष्क्रिय, ताद्रूप्य, सौन्दर्य, स्त्रीजन, लिख्, केसरिन्, संमर्ज्




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