प्रकाशन

प्रकाशन
प्रकाशन /prakāśana/
1. освещающий
2. n.
1) освещение
2) откровение




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दुर्लभस्वामिन्, प्रयत्नवन्त्, द्रवत्व, बौद्धमत, अनुधाव्, संशिति, पारलोक्य, मुदिर, स्यन्दन, विवृत, मुद्, तरी, मनीषिका, वृद्ध, रवण, राजता, चरितार्थ, सोमावन्त्, आश्रयभूत, हिंसन, छिक्कार, आख्यायिका, श्ववाल, परिवर्तय्, भागिन्, पौत्रिकेय, हविस्, हला, पशुघ्न, संप्रोक्षनी, जल्पि, विनिपत्, प्रत्यभिधा, बर्ह्, कातन्त्र, दोःशालिन्, यज्ञक्रिया, दिगन्तर, धवलपक्ष, अधियज्ञ, धार्मिक, चूर्णीकरण, उपायन, वीतभी, अभिसद्, शीतभानु, मादयिष्णु, संभार, , पुरंधि, आत्म-लाभ, सप्तशतक, प्रत्यङ्ग, चात्त्र, नष्टातङ्कम्, प्रारम्भ, रयिमन्त्, उपगा, स्था, प्रस्वापय्, ध्वस्मन्वन्त्, विजयवन्त्, विश्वगूर्त, कपीश्वर, कुयवाच्, सदो°, विष्णुपत्नी, एङ्, वेध्य, विनायक, अभिरूप, वनोपप्लव, योक्त्र, स्फर्, मध्येपद्मम्, वात्स्यायन, सुलभेतर, स्वीकार, आवपन, टङ्कच्छेद, वृजनी, नोदन, दुर्विद्य, समभूमि, प्रावार, आसन, प्रमुष्, निर्हृति, निर्घोष, देशक, अपिहित, प्राश्वमेध, विश्रम, स्खल्, शनैश्चर, प्रश्चोतन, तार्क्ष्य, विपक्षभाव, नाकलोक, गर्ह्य, दुर्दर्श, क्षणदाकर, कुसीद, इयन्त्, कामवन्त्, भाण्डागार, सुबन्धु, वितस्ति, शल, दुःशला, फेत्-कार, भाति, स्पश, विरच्, गल्दा, उपमान, अज्ञात, रमति, तृपल, क्रीडन, सप्तरात्र, परिणद्ध, प्रतिपात, जीर्णवस्त्र, स्नेहमय, लोप्त्र, निमीलन, क्षुरकर्मन्, धवलता, कृतक्रिय, शालङ्कायन, त्रैगुण्य, सर्पी, पङ्गुक, उपक्षेप, अभिक्षदा, पुरोधा, संसेवा, निष्क्रमण, ऋजु, निपठ, विष्, संगत, गृहकृत्य, अवीरा, कष्ट, शशिप्रभ, बर्हिष्मन्त्, वन, बन्धुता, यदी, निक्रमण, श्रवण, नस्, एकविंशत्, मानयितर्, अवगाढ, यानपात्र, हंसाय, बीजकाण्डरुह, पाञ्चालिका, अकुल, निग्राभ, गाह्, स्रिव्, कल्, निर्भी, छत्त्रधार, वैधवेय, होमन्, यदृच्छ, सत्यशवस्, गुर्विणी, पूर्वदिश्, कार्पास, अनेद्य, वंश, पलायन, निःसाध्वस, आच्छादक, वृक्षनिर्यास, °धारक, सौम्यत्व, निर्नाथ, आपर्, च्यावन, प्रासादिक, मृद्, विध्, अवस्त्र, परार्ध, पिप्लु, द्योतक, भद्रता, वृष्टि, प्रोह्, वृत्, सूना, नड्वन्त्, निश्वासित, काञ्चनीय, निर्ग्रह, आचार्य, वितोय, ईष्, प्राश्निक, अवध्यत्व




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