भक्तिमन्त्

भक्तिमन्त्
भक्तिमन्त् /bhaktimant/ см. भक्तिभाज्




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सारिक, आधिक्य, प्रलपन, दलशस्, आपूर, पठक, निटाल, पथिपा, ज्योतिस्, परासू, प्रस्मर्तव्य, उत्पट्, अमरकोश, सर्वभोग्य, प्रादक्षिण्य, पृक्ष्, सुरसरित्, निर्व्यथ, गोपालिका, दुःशला, वालवासस्, दैत्यारि, यादव, अन्धस्, परिग्रहीतर्, अभिलप्, संग्रभ्, पीड्, देष्ट्री, दघ्, मूढदृष्टि, कण्ठ्, रम्भा, निदाघ, मनोज्ञ, सानन्द, हिंसीर, प्रद्वार, बन्धनस्थ, शरदिज, अनतीत, देव-गण, संरुध्, घृष्वि, विधुरता, व्यतिकर, पलिक्नी, आर्यता, मद्र्यञ्च्, अविश्राम, अविनीत, ध्रुवगति, शनकैस्, तुल्य, कर्मठ, आशुगमन, वीध्र, तारिन्, सचित्त, नेत्री, सुप्रीत, भिक्षा, नृजित्, स्यन्द्, बहुप्रकार, ज्योतिर्ज्ञ, स्वयम्, धूमकेतु, वणिज्या, अग्निमित्र, मृधभू, दुर्गसेन, अधिगा, संसारिन्, संत्यज्, वसु, शुण्ठ, भू, घर्मान्त, शङ्ख, जायात्व, सितेतर, माया-योग, निषादिन्, अधीत, उदुम्बल, दिविक्षय, विबाली, कशा, मरु, परिसिच्, संप्रतिज्ञा, शठ्, सुबोधन, वीरेन्द्र, ऋतुशस्, प्रविविक्त, ज्ञाति, वत्सिन्, निरम्बर, मृदङ्ग, कीरि, विवर्तन, ग्रहण, द्वय, स्वयंवर, कूदी, स्थाप्य, द्वैमास्य, अनसूया, नभःसिन्धु, दय्, भूरुह्, पराजिष्णु, सर्वज्ञता, श्रमजल, महाभारत, नरत्व, समितिशोभन, मूर्छन, विभाग, नव्य, कुरर, उत्तंस, बृहच्छ्लोक, प्रैष, अल्पभुजान्तर, वाजसात, रथ्या, नवपद्, गुणग्राम, धरुण, अवभासन, अनुवस्, रत्नवन्त्, रथविज्ञान, दासजन, दिविष्ठ, प्रसि, दन्ता°, गूढज, पौरुषेयत्व, एकशस्, कैकेयी, खण्डधारा, कठोपनिषद्, पापमति, मरकतमय, गाम्भीर्य, वराङ्गना, सह, इन्द्रत्व, संभरण, तत्कालीन, द्विशिख, आसद्, श्वेत्य, मर्त्यलोक, सम्यक्ता, कुत्स्, प्रारोह, वार, तन, दुःखोपघात, उपगीति, संदेश, सौवीर, वंशकृत्, अपक्ष्य, प्रतिपादम्, हिमांश्वभिख्य, कण्टक, सुप्रवाचन, मित्रलाभ, संप्रछ्, रोहक, कनिष्क, नट, भाषा, शास्तर्, क्लप्, बोधक, अधर्मिस्ठ, जीवसाधन, छायाद्रुम, निर्वाक्य, रणशिरस्, उद्भेद, निर्भेद, कीट, सुरापाण, सान्दीपनि, सर्ववीर, कुट्टिम, दासी, द्व्यक्षर, धराभृत्, प्रवाद, अनुषङ्ग, प्रतिदिनम्, शुभ्रता, गर्ज, वलक, इडा, प्रतारण, प्रतिवेदान्तम्, विचर्




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