जगद्धात्री

जगद्धात्री
जगद्धात्री /jagad-dhātrī/ f. nom. pr. Хранительница мира — эпитет Дурги или Сарасвати; см. दुर्गा, सरस्वती 1)




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ससभ्य, उदर, सक्थन्, विस्तर्, मन्दधी, नीलिमन्, बल, पञ्चमुख, वैश्वरूप, मौलिमालिका, सकर्णक, संयम्, निरर्थकत्व, , दोषन्, सनितुर्, प्रजावृद्धि, मौन, गोचर्मन्, निर्वक्तव्य, काकलि, मुनिवेष, आचि, ससंभ्रम, द्यूतकार, परीक्ष्य, स्वर्गिन्, प्रत्यभिज्ञा, महासार, तेजिष्ठ, करोटि, वेणी, संनिधि, मेध्यता, उन्मथ्य, कालान्तर, परिवृद्धि, निष्प्रभ, दूरग, परतः, दानिन्, प्रतिनिपात, प्रत्युत्था, समर्थ, अप्सरस्, पुरो°, संभाषिन्, वयस्वन्त्, मोद, नवांशक, अपविद्ध, परिस्तर, अशनाया, अभिदीधि, निरङ्कुशत्व, शक्तर्, संप्राप्त, द्रुग्ध, निष्पेष, कर्त्, एनास्, महारण्य, द्विपायिन्, विमेघ, अवसर्ज्, दरीमुख, उच्चैर्धामन्, उन्मज्ज्, निरुपाख्य, अभिरोचय्, सेक, पराजय, त्रिपुरुष, दोधक, सक्त, निवत्, दृशीक, हितार्थिन्, भागिनेयक, एनोस्, रथवाह, महाप्राज्ञ, अद्ग, °संश्रयात्, मारीय, अभिसर्प्, अदून, वैतस, श्रेणीभूत, प्रमति, प्रतिवद्, मांसमय, हस्र, दुराधर्ष, प्रसादय्, उज्जृम्भ, सर्वानुक्रम, स्वङ्ग, नाकेश्वर, हस्ति°, ससाध्वस, निर्णेक, अलक्तक, मातामह, सप्रभ, ग्रामीण, स्येदु, सर्वधा, दिग्विजय, वार्त्रघ्न, दुर्गसेन, मातुल, शाठ्यवन्त्, अजित, घण्टिका, बौद्धमत, शिबिका, पारमेष्ठ, मागध, नीथ, पदन्यास, उद्बाष्प, समुपोह, अनुरज्, जातकर्मन्, चतुःशत, जाप, महादेवी, शा, पुलोमजा, त्वच, संलप्, वेष्ट्, रतिरस, सुषोम, ओह, निदाघकर, मियेध, जहु, लोप, कक्षा, असुर्य, कमलाकर, अवलोक, निःसिच्, रात्रिरक्षक, आख्यात, द्रव्यवृद्धि, घूर्ण्, अतिबल, संक्षर, सर्ज्, भ्रू, अनतिलुलित, सशङ्क, भाणक, सुशर्मन्, दर्शिन्, स्वभावतस्, नीध्र, याच्ञ्य, भागिन्, मुद्रिका, वेद्या, उपार्जन, अभिमान, कुरूप, सुवर्णकर्तर्, अनाविद्ध, प्रशोष, भाववन्त्, वर्षन्त्, दाशेरक, निषेविन्, असमृद्ध, नागराज, पैण्डपातिक, समित्ह, ध्मा, धुरंधर, परीणस्, वियन्त्, समारब्ध, प्राणिन्, विंशांश, पयस्, संचरन, निवात, निरुत्साह, द्वारक, प्रतिक्रिया, लुञ्च्, संधिनी, विनम्र, हविर्यज्ञ, अचल, संगम, छुबुक, परकृत्य, व्रजन, अनुगम्, सावेगम्, निर्माण, वृद्धिमन्त्, भूषा, मूत, त्रिजननी
сборка мебели, литовский словарь




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