उपश्रु

उपश्रु
उपश्रु /upaśru/ (формы см. श्रु )
1) прислушиваться; внимать
2) обещать




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अप°, शील, योजन, श्मशान, ओकार, नाभिमान, भारवि, हा, अतिपिनद्ध, कौतुक, सार्वभौम, मज्मन, सवनकर्मन्, स्नुषा, मन्युमन्त्, स्वयंवरण, अस्त्र, पौष्कल्य, विराग, अजावि, खात, रणित, विमानय्, वीचि, संदीपन, नह्, विक्रम्, विषघ्न, छुरिका, तृणाङ्कुर, विबाध्, निष्ठा, नर्तनागार, तिर्यग्ग, पृथा, स्वर्गमार्ग, उद्गम्, गरिमन्, कलुषमति, नागारि, शालिन्, चिरि, स्रावण, उरण, व्यजन, अन्त, आतर्, परितुष्टि, संज्ञक, प्रकाश, उत्पादक, श्रव्य, बालघ्न, शिंशुमार, व्यश्व, अतित्वरित, अभिग्रभ्, श्राद्ध, मुखगत, अत्रा, रम्, अञ्जना, श्री, पृथक्कार्य, तुलिम, यतव्रत, निःसर्, दूराकृष्ट, द्यावाक्षामा, पौत्रिकेय, अर्चय्, दधि, वीणा, ससंभ्रम, देवरात, पांसुक, पिन्व्, शुक, अभिशास्, उष्णसमय, चूतशर, प्रतिमन्त्रण, उपसेव्, चातुर्वर्ण्य, विस्रंस्, हिमांश्वभिख्य, निचय, विभक्तर्, एतश, गाय, अशीति, नस्यकर्मन्, उदकुम्भ, वैभाषिक, आयाति, द्राक्ष, इतिहास, विधम्, सिद्धाश्रम, ध्वाङ्क्ष, सेधा, सदेव, शाक्तीक, चित्तभ्रम, प्रतिपूर्त, अपलप्, सविषाद, मर्यादा, प्रवा, अश्, महोरस्क, प्रतिदर्श, अन्नरस, तिग्मेषु, निर्देश्य, पिश्, विमाथ, लेख्यगत, द्व्यक्षर, प्रव्राजन, विश्राम, पञ्चदशवार्षिक, उत्सिच्य, यवस, गोनसा, विचेष्टन, चापिन्, वश्य, अवस्वप्, साक्ष्य, क्रमागत, उद्वर्, द्वादशविध, प्रकर्मन्, सुभट, तुल्यार्थ, हुतशेष, प्रतीक्षण, करिन्, कटक्रिया, शतद, विष्णु, कुतूहलवन्त्, अनुयाच्, क्षिप्र, लोमकूप, रोचस्, उटज, दानवीर, अरस, सानुनय, महाढ्य, स्वर्गमन, साकाङ्क्ष, सरघा, गुन्द्रा, संवर्ग, शिप्रा, महदर्घ, भाविन्, , मध्यमलोक, हंसपाद, अवमानिन्, व्ययन, शातोदर, गुरुतल्प, मुनिवन, अवाङ्मुख, निरर्थ, करिणी, ताम्रकुट्ट, परिमाण, नालिकेर, सु-हृद्, अवध्यत्व, सनक, क्षेमिन्, अतसि, स्वगुण, सामान्यतस्, निःसंशय, अवेक्षण, संशृ, शैलगुरु, स्ववश, लुम्बी, सारापराध, प्रभर्तर्, साजात्य, विधेयी कर्, उद्घातिन्, परिच्यु, सधस्तुति, दक्षिणत्रा, मर्, शिष्, गविष्, शौरि, पुण्यशील, गुणवन्त्, करी, जयद्रथ, स्यम्, प्राशितव्य, ऊढ, अकूपार
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