विप्रनश्

विप्रनश्
विप्रनश् /vipranaś/ (формы см. नश् I ) теряться; исчезать




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प्रतिबल, अस्वतन्त्र, दुःकृत, निशारत्न, शय्या, नाकनायक, दिवसनथ, गृत्स, ब्रह्मजाया, तिग्मता, स्विन्न, कैकेयी, उत्था, गोपालिका, ऊर्ध्वरेतस्, मूतक, हृष्ट, संभरण, मलिम्लुच्, संपूरय्, गोनसा, समुपज्ञा, दृढ, प्रदोषक, बालेय, अनुगुण, रध्, प्रयत्, त्रिपथ, प्रवेशन, सभ्य, वेला, देवजुष्ट, रिक्थिन्, हत्या, ऋभुक्षन्, तनूपान, स्कम्भ्, मर्त्यलोक, उदञ्च्, रक्तवर्ण, लल्, सूदन, जयन्ती, पङ्किन्, यूनी, अवन, आख्यायिका, प्रवर्ग्य, हट्ट, द्युतिमन्त्, मुद्राङ्कित, प्रपत्, मोचक, वितार, नितोदिन्, द्युनिश्, मेघमाला, प्रतिषिध्, दुर्विषह्य, कामग, उपान्त, नेद्, धित्स, शतह्रदा, द्वित्रि, हिंस्रपशु, अम्बालिका, संशुष्, ज्येष्ठतरा, त्रियामा, निरवस्कृत, तोयचर, वर्धन, परितस्, महायज्ञ, यज्ञवाहन, भौर्ज, सुमध्यमा, काल्य, देहवृत्ति, ओज्मन्, पादिक, क्षत्तर्, तण्डुलकण्डन, प्रह्व, गाम्भीर्य, आसाद्य, सूद, अकरण, ज्वलन्त्, °जानि, प्रणिपतन, लुण्ठि, भुजि, प्रतार, विमोच्य, निशुम्भन, सोद्योग, वृषदंश, विषिन्, सुश्रीक, लिङ्गधर, समशस्, ऋष्व, लौकिक, इरिन्, ब्रह्मभवन, रुच्, उपाव्, शब्दपति, क्रयिन्, परिपन्थक, व्यूह्, सचिन्ताकुलम्, वर्षण, अलक्त, कृतहस्त, मातलिसारथि, मयि, कुट्टनी, स्राव, शाककाल, प्रपणिन्, तानव, अनुनय, साह, अतिग, शीत-रोचिस्, चञ्चरिन्, चोदितर्, फण्, कृतकार्य, सूद्, संग्रथ्, सुगु, प्राज्य, आर्यजुष्ट, पितामही, विश्लिष्, निरूठि, लेलया, द्युनिश, अवलू, तोष, पवन, मकार, लोपन, निःस्नेह, दृढमुष्टि, फलयोग, चलात्मन्, भ्राज्, संस्तु, भषक, अभिसद्, अनवरत, दर्, विकर्, निःषेचन, सिंही, सप्तम, भव, व्यङ्ग, संसृष्टि, अव्याहृता, अजेय, वराटक, वादयुद्ध, सुदुष्ट, पैतुदारव, विलुभ्, स्वधिती, पञ्चसप्तति, अकृषीवल, व्याचक्ष्, आहिंस्, दुर्विषह, संकथन, वडवामुख, अरत्नि, साग्र, बहुसाहस्र, राजर्षि, वल्कल, निर्जिह्व, दुष्टचारिन्, तत्कालीन, गजानन, सर्वयत्न, नृदेव, प्रपठ्, वैभ्राज, मधुरस, संविद्, जनि, सर्वज्ञातर्, हरशेखरा, प्याय्, अनवसिता, द्वैत, भ्रूकुटीमुख, वेत्तर्, संहरण, अनुवृत्ति, संवत्सरसहस्र, दिवसकर




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