मुग्धबोध

मुग्धबोध
मुग्धबोध /mugdha-bodha/ n. «Понятный для детей (неразумных)» — назв. грамматики Вопадевы, написанной в XIII в.; см. वोपदेव




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रक्त, आत्मवध, क्षत्र, दुर्विनीत, मोहुक, अर्चय्, शौण्ड, निरपेक्षिन्, षड्विंशब्रह्मण, तच्चरित, तिरोभाव, दुष्प्रणीत, वाजयु, आरिफ्, प्रधृष्टि, दृढधन्विन्, वाहित, कुत्र, उशीर, पादधावन, सर्वभक्ष, निनशिष, प्रहृत, द्रुतविलम्बित, षट्पद, अनन्त्य, निगम्, समुद्वह्, आनन्द, पुष्, जलाधार, सर्वथा, मत, आनु, मात्रा, उरूणस, त्रस, दत्, कातरत्व, °ह, नड्वला, निर्माय, लोमन्, श्रोत्रवन्त्, सभ्य, उत्स, गाथक, यशोघ्न, अविषादिन्, वृन्दीयंस्, विदथ, दीर्घदर्शित्व, मेधा, पौरिक, वसुमत्ता, दोहदलक्षण, अभिसंधान, सुरत, महिन्, हर्यत, दृष्टिप्रसाद, आस्तीक, सरघ्, सखि, बाल, तनिष्ठ, माध्यमक, कृशानु, स्नानवस्त्र, यु, संप्रदान, वेणु, सर्वहुत, कृताञ्जलि, महाजव, आजीव, व्यत्यय, परिचारिन्, अधिद्रु, उपभर्, उपप्रहि, सविस्मय, पदान्त, शीघ्रता, गोचर्मन्, प्रत्युत्पन्न, स्त्रीजन, होरा, ग्रन्थन, रयि, विश्वामित्र, केवला, सारफल्गुता, सुशान्त, दधि, गूढार्थ, आलि, तिलकय, सूचिभेद्य, प्रतिग्रामम्, निनदिष, पङ्क, मुण्डितशिरस्, आविश्, यथासङ्गम्, स्वरण, वसुमती, उच्छित्ति, आमिषाशिन्, चक्षण, निशुम्भ, अदार, सनता, उपयान, वलीवदन, सनितुर्, वसन्त, मातृका, द्योतक, त्रयोविंश, मातामह, वंशकर, नृधर्मन्, श्लथ्, स्कुम्भ्, सर्पविद्, ककुद्मन्त्, सौवीर, असत्त्ववचन, अविषम, संख्या, स्थूललक्ष, किण्व, नीकार, पिचु, प्रत्याशम्, योषन्, आशु, योषणा, दुर्दृश, हवनश्रुत्, वाशी, आरुह्, आग्नीध्र, सहन्तम, समनन्तर, सुज्ञ, चम्पा, वस्त्राञ्चल, मण्डितर्, धनू, द्विपद, सीताद्रव्या, नागारि, निधिनात्ह, नद्धि, ओज, हिंस्, वसुंधारा, आवेष्ट्, यातु, परिवर्तय्, परिपाटी, जरासन्ध, विलङ्घय्, तरस्, मन्त्रित, नावोपजीवन, नभस्मय, संग्रथ्, अवपात, नखाङ्क, अकुसुमित, श्वठ्, तरुस्, लोम°, तैमिररोग, मिश्रण, दौहित्रि, पितृदेवता, द्रापि, अगम, नैक, विसंशय, जनी, लक्ष्याभिहरण, वेमक, कुलदेवता, वशीकर, अस्रिध्, एकभूत, द्युसरित्, अधीश, युति, हस्तच्युति, वर्, मदोदग्र, शतसनि, शिशिरमयुख, जुवस्, पुराकथा, परिहार, पराह्ण, रङ्गद्वार, अभिष्टु, हिमाराति, केवल




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