देवनाथ

देवनाथ
देवनाथ /deva-nātha/ m. nom. pr. Владыка богов—эпитет Шивы; см. शिव 2 1)




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पञ्चथ, अनुत्त, परीप्सा, अनिर्वृत्त, आवर्, भरण, सद्रत्न, निर्वाक्य, वचोविद्, अलंकृति, हिरण्यज्योतिस्, एतत्काल, उपचयावह, विरच्, सानुक्रोश, संकेतक, गृहिणी, आभिजाती, वनिष्ठु, परितुष्, पिण्डिका, सरघ्, नैकटिक, आलेपन, पट्, तकार, प्रतिसच्, स्पश्, क्षैत, स्थूणा, रथ, प्रदह्, त्रस्, ऐरावत, समर, अतट, हुतभोजन, तैस्, चतुरश्र, अभिविनीत, सुबाल, दुष्टरीतु, संभृत, तुलाधारण, समीपत्व, सिद्धिज्ञान, मूर्धग, अद्भुतोपमा, क्रमायात, नराशन, कथनीय, प्रतिगर्ज्, तोद, नृलोक, शाम्ब, सुखस्पर्श, दुरुपदेश, चन्द्रक्षय, शूर्पणखा, हितकर, प्रवचन, गौरी, प्रतिप्रति, सुवर्णकार, मुक्तारुच्, विप्रकृष्ट, वालधि, बन्दिन्, ऊर्ध्वपुण्ड्र, पारतः, प्रावार, नामकरण, चातुर्विद्य, सर्वाङ्ग, सप्ततय, गु, प्रत्यूह्, हवनश्रुत्, उद्गम्, ग्रैष्मिक, अधीरत, चैत्यद्रुम, °पर्व, ईक्षित, राजकुल, तर्ह्, , सिंह-रव, अनुसार, श्रावितर्, आक्रोश, पायक, वायुवेग, तपनी, वप, सदसस्पति, रायस्काम, अपराधिन्, अजरन्त्, जनाधिप, महत्तम, कृतार्थत्व, निलीन, मर्श, सायक, उपपादन, अकर्मण्य, जलस्थ, दुष्प्रसाद, नदनदीपति, वेण, एज्, वल्क, चित्रन्यस्त, देव-यज्, श्वन्, नाध्, शितधार, पूर्वदक्षिण, समूल, उच्चारण, शनैस्, संकोच, निमित्तविद्, विश्रम, उपोदासर्प्, वैवाह्य, विश्वामित्र, प्रणष्ट, प्रयज्, °स्था, सरोग, सप्तरश्मि, शुठ्, कुशूल, उदाहार, क्षेत्रपति, गन्धर्व, उच्चसंश्रय, अवतरण, अधिपा, दशबन्ध, अपहा, तक्षण, सख, क्षयित्व, नवग्व, सुसत्कृत, अधी, देवन, मुखेन्दु, जयघोष, विजिह्व, सौवर्ण, भरद्वाज, रत्नप्रभा, परिपूर्ति, व्यय, सुरद्विष्, पदपङ्क्ति, वायुमार्ग, नवी कर्, अनुया, प्रतिकङ्चुक, विवृद्धि, सिन्दूर, धेना, निवेदिन्, सुभूति, जलेचर, घातुक, रासभ, प्रश्नाख्यान, हंसवाह, अस्थन्, जलाञ्जलि, श्वाग्र, आख्यायिका, त्यागिन्, वेदी, वर्धकि, आजीव, प्रधर्षणा, अद्, हेतुमन्त्, विगन्ध, स्नेहवन्त्, दुर्लङ्घ्य, सौरभ्य, स्वयंवरा, पाक्षिक, जातकर्मन्, शिरोग्रीव, भीलुक, मन्दी कर्, पणबन्धन, संमुह्, कङ्क्, मिष, प्रज्ञप्ति, आश्रु, षड्विंशब्रह्मण, मिथ्या-वृत्त, तीर्ण, सौप्तिक, महातेजस्, सश्लाघम्




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