प्रत्याहर्

प्रत्याहर्
प्रत्याहर् /pratyāhar/ (формы см. हर् )
1) притягивать, тянуть назад
2) приносить обратно
3) получать обратно
4) высказываться




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गुर्विणी, तस्मै, डमरिन्, स्वर्ण, सप्रज, मन्द्र, परी, सुप्तप्रबुद्ध, गर्, शलल, शप्तर्, प्रत्युद्गम, सङ्गिन्, परिस्रुत्, सपक्षता, संप्रणेतर्, अव्ययीभाव, ऊर्ध्वगति, क्रियायोग, संविज्ञान, मुग्धबोध, अवलोक, सनामन्, वे, सु, प्रक्रय, नगरीबक, नैर्गन्ध्य, हीनरोमन्, परिगम, इमान्, तुद, परशु, निष्पदय्, सेल्, प्रयुत, तैमिरिक, मित्रद्रुह्, निस्तारण, प्रपक्व, श्यामित, वप, वसव्य, कुलिक, नवग्व, शम्बूक, अन्वाहर्, हम्भा, मध्यमपुरुष, उडु, संबुद्धि, प्रसह्, दिगम्बर, शिलापट्ट, दुर्, परिभर्, प्राकाश, मनीषिका, मेदस्, धनुर्गुण, विषाणिन्, निरवद्य, लाभालाभ, लक्षान्तर, ध्वनिनाला, मधुरभाषिन्, परिमर्द्, विडम्बना, निरात्मन्, प्रमातर्, शुद्धवंश्य, सुरलोक, सनि, ऊर्ज्, आसञ्ज्, पत्त्रिन्, वितृष्णता, मेघजाल, वनोद्भव, श्मशानपाल, अपिधा, मुख, स्थिति, देवयज्या, उञ्छ्, वाच्, शीघ्रता, प्रधानता, तिर्यञ्च्, अद्वैध्य, मुखगत, महारथ्या, श्रवस्य, चित्रवर्ति, अदार, अरुण, सहस्रशीर्ष, याचक, निगारक, परिलुभ्, द्विशिरस्, जाम्बूनदमय, शृङ्गाटक, भविष्णु, अनुग्राहक, जुष्, अश्मन्, व्यद्वर, ब्रह्माहुति, विभुत्व, महीपति, अतिक्रम्, अभ्यापय्, अज्ञता, निशागम, शमन, मृचय, नियोजन, शबल, कृष्णनयन, वैराग्यशतक, संवर्धन, प्लवन, विभु, किम्-शुक, प्रतिबाहू, सुसाय, समीपत्व, तदवस्थ, उत्पीड, लिट्, धारायन्त्र, वक्व, विविध, वेणुमय, दम्°, अप्नस्, पराजिष्णु, निःष्पन्द, विनिःसर्प्, दृप्, औषस, उत्पादक, सायक, लुप्तोपमा, व्रतस्नात, विद्यार्थ, प्रसन्न, गोविद्, प्रत्यभिघारण, वीथि, जलवन्त्, अभिजन, अतिनी, श्वैत्र्य, प्राणहारक, ज्रि, यव्य, कनकवलय, खद्योत, श्वेतपक्ष, उडुप, विद्रु, शिष्ट, अपरा, दघ्, सहस्रभृष्टि, सप्तर्षि, आज्ञप्ति, केसरिन्, निसर्ग, षष्ठांशवृत्ति, विभीषण, गगण, साधक, , हस्तिन्, स्रंस्, महानस, सुयत, सुराप, सहस्रवलिश, निर्दुःख, आभ्यन्तर, आकर, विभू, स्थण्डिल, श्रु, बाष्पसालिल, अर्धर्च, आसेक, लक्षणसंनिवेश, हि, अपाश्रि, प्रवास, धराधिप, पुरुषकार, जीराश्व, त्रिदशालय, सारण, वाट्, शय, अन्तर्भाव, जिग्यु, अक्लिष्ट, पुरोडाश्, निरास्वाद




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