घाटय्

घाटय्
घाटय् /ghāṭay/ (caus. от घ्ट्)
1) вредить; портить
2) объединять; складывать




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अष्टाचत्वारिंशत्, श्रेष्ठता, विशाख, कृत्व्य, उच्छ्रयण, अदन्त, अपोह्, अल्पक, अरिष्टताति, क्षिपा, महाहस्त, उदञ्च्, पृथुलौजस्, समञ्ज्, कर्षय्, आश्व, पीठ, सजल, संदेशहर, शालिभवन, मातुल, मुग्ध, निक्वण, मुग्धाक्षी, पुण्यश्लोक, परिसाधान, सर्पविद्या, अन्ततस्, प्रख्य, विगतज्वर, मन्द्र, बन्दीकृत, मूलक, वदनमारुत, स्नपन, अनुरुद्, स्फोट, तृप्ति, दुःशीलता, व्याकरण, निस्तरण, अपमृग, वैरिता, हृदीक, निहित, तूणवध्म, सिक्ति, हन्, दुर्लभवर्धन, मृगदृश्, जनक, अपद, नैशिक, रद्धर्, सह्यता, वियत्, प्राग्वत्, उपल-प्रक्षिणी, अभ्यागारिक, आलुड्, कर्णिन्, करस्थ, कलश, धैर्यता, वृद्धिमन्त्, वृत्र, आलम्भ, उक्थ, अर्चिस्, मूर्धग, सुदत्र, प्रतिरव, बहुप्रजस्, दुरतिक्रम, रि, प्रतिहाराय, जिह्म, आशी, नीलवस्त्र, योस्, वैयाघ्र, परिपालक, केशव-पन, तत्त्वभूत, सुधा, मैत्रेय, उद्घट्टन, दाक्षिण्य, हस्तगत, प्रत्यवेक्ष्, सख, दयातुत्व, व्रणय, वरस्त्री, अल्पभाग्यत्व, हविर्दा, प्रस्वप्, नैकट्य, मेषिका, लेलिहान, तपोरत, खाद्, संशुष्क, कुथ, पुरस्तात्त्न, स्तम्भिन्, आवपन, दारी, उक्तपूर्व, संमनस्, पतिप्राणा, सत्यवन्त्, आह्निक, मधभाग, देश्य, निःशङ्क, निष्क्रान्त, प्रवृध्, सहासन, विश्वह, जनित्र, देवहूय, रथाक्ष, भोगपति, संज्वल्, वीणा, आक्रम, अभिहु, अतिलङ्घ्, धनकेलि, काहल, प्रविविच्, शीतमरीचि, व्रण, धीवर, अलस, दुश्°, भूमिजात, गुणागुण, प्रणपात्, संकेतक, क्षितिकम्प, अविचार, हीहीकार, संयमन, मन्त्रिपति, कर्बुरा, नाटिक, फलता, त्रिजननी, नपुंस, अस्वस्थता, द्वार, समानजन्मन्, पूत्यण्ड, वसुमत्ता, शठधी, निश्चेष्ट, लङ्का, शितिपद्, दक्षिण, निर्गुल्म, अमराधिप, अभिपट्, परिभ्रम्, शाखाभेद, निम्न, जेमन, लावण्यमय, दातृता, प्रतिपक्षिन्, हित, वनभू, शर, मारीय, संनिमित्त, दुरूह, गणप, सागरान्त, उपादा, भाषित, प्रत्यृतु, दारण, अयथार्थ, प्रमाथिन्, स्वायंभुव, प्रैष्य, प्रियभाषण, अभिख्यापय्, समुपार्जन, वल्मीक, मिथ्यावादिन्, लुप्, कामवासिन्, आकल्, सितकमल, वर्षशतिन्, वाचय्, उड्डामर, उदक्तात्, उल्का, ऋतु, द्रष्टर्, नादेयी, समरण, पानस, अवमर्ज्




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