वरवर्णिनी

वरवर्णिनी
वरवर्णिनी /vara-varṇinī/ f.
1) красавица
2) женщина




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उपसंहार, हनन, आयु, ब्राह्म्य, विकीर्ण, सुहव, जेय, संसर्जन, सुवर्णकर्तर्, सततयायिन्, समावच्छस्, त्रैपद, साकेत, दूरपथ, निःष्ठिव्, अमति, अनामुक्त, लोकोक्ति, पक्षान्त, पिण्याक, धराधर, उत्कर्ष, क्षि, दधिवन्त्, दूतत्व, अनुग्रह, वाजसाति, कालकृत, द्वेषणीय, वनभू, राजपुरुष, प्रतनु, मातर्, अनून, नामधारक, दर्शिन्, हैतुक, दिविक्षित्, समुदय, परोष्णिह्, वरार्ह, परिश्रु, व्रज्, विस्फुल्, संकर्ष्, निनद्ध, भूरिदावन्, उद्भिद्य, विसर्पण, संभावित, प्रवद, तनुत्राण, अनुमन्, दिर्घमुख, ओकस्, परिस्पन्द, जामित्व, काण्डीर, वर्षशतिन्, वसुधाधिप, श्वोवस्यस, द्रव्यवृद्धि, छेलिका, हल्, पुष्पामोद, परिविद्, परीक्षक, शौल्किक, विद्युन्मालिन्, रसप्रबन्ध, प्रभात, महापार्श्व, लोमकूप, आयामवन्त्, सीमन्, अमरुशतक, स्मय, शाबल्या, रुद्, प्रोदक, ललिलविस्तर, आपद्गत, दैवपर, स्तन्, विष्णुपुराण, स्रोतस्य, दुर्वार, शरवण, पत्ति, निर्विशेष, अदृपित, संवरण, सुवित्त, शाखामय, आलोक, सोढर्, , ऊर्ध्वबृहती, कटकरण, रेष्टर्, योगवन्त्, व्रटवन्त्, प्रव्राजिन्, सविक्रम, वरीयंस्, वातापि, अम्बुराशि, उदि, ऋद्धिमन्त्, स्मितपूर्वम्, नाथ्, शग्म, पादरजस्, दौष्यन्ति, अवीरा, देशी, त्रास, विषु, विस्मृति, वर्चस्य, कृष्णवाल, पारिहीणिक, मृग, तति, निरन्तर, परिपार्श्ववर्तिन्, ह्लादन, शशलक्षण, वीरुध, कुटी, खोर, मेदस्, शंवन्त्, रूपधारिन्, अतीर्थ, निह्राद, आस्कन्द, गुर्, वैकुण्ठ, दुराक्रन्द, विमूर्त, उद्भूति, उत्प्रेक्षा, प्राक्शस्, अपटुत्व, स्फोटन, मुनिवर, सद्वृत्त, अभिपट्, शाला, अनुशुच्, महागण, महीभृत्, वेट्कार, चलन, अन्त्र, आशिष्ठ, स्वज्, पुंनपुंसक, मघव, चेटी, संक्षेपतस्, -आशिन्, अतिचार, जात्य, वान्ति, त्रयस्सप्तति, अवस्वन्, सौभ, निचय, पञ्चविंश, सुव्यक्त, दम्भोलिपाणि, विरु, समनुमन्, विनिवारण, देवसृष्ट, श्वस्, दृषदुपल, नमय्, दम्भ्, सहौजस्, पताकिनी, अभिराद्ध, होमन्, तपान्त, गोप, पुलोमजा, वसाय्, त्रिपुराराति, दुःख-कर, वृन्त, क्षेत्रविद्, जीवितसम, वृति, प्रतिमुच्, विरोधन, महर्षि, सुवेद, क्षुद्, सुप्रज्ञ, साक्ष्य, संशित, प्रदीप्, वडवा, प्रतिरव, संप्रैष




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