संदर्शय्

संदर्शय्
संदर्शय् /saṅdarśay/ (caus. от संदर्श् )
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पयस्य, अह, जननी, लभन, अष्टाविंशति, यथापूर्व, उदच्, प्रागुण्य, रक्षिका, सुकुमारत्व, विवृति, प्राप्, पनाय्य, संकुच्, दुःस्पृश, शिरोभाग, एत, जगतीभर्तर्, पौरसख्य, अभिवन्द्, उदक, विपाक, सिंहासन, रथोद्धत, अनुस्वार, पश्यति, नागबधू, आपीन, वासार्थम्, रणाङ्गन, मुख्यता, शूल, महाहव, हन्तु, पुस्तिका, महाकल्प, श्रीमत्ता, सापत्न, कुलीर, क्षितिकम्प, तनूपा, जंहस्, कृशानु, क्षामि, पल्पूलन, रोम, मुक्तारुच्, सदश्व, वैशिष्ट्य, ग्लस्, हरिणप्लुत, क्षितिभुज्, प्रवर्ष, आकर्ष्, प्रात्यहिक, प्रतिभास, °मध्यवर्तिन्, प्रजागरण, मध्यतस्, उपनम्, स्वादुता, मृतकल्प, स्वप्, नैदाघिक, निर्ऋथ, यथाप्राणम्, अभिष्टु, समाश्रि, ध्वजिनी, खण्डन, तितिक्ष्, उपधा, कुलाय, सिंहद्वार्, नैत्यिक, स्पृहावन्त्, ल्+_, नगरौकस्, वरेण्य, निष्कारण, स्तनपान, प्रभविष्णु, तृतीयदिवस, क्षत्र, रजिका, दोला, अङ्गारपर्ण, प्रतिपद्, अवनि, संयतेन्द्रिय, अवस्फूर्ज्, पूर्वशैल, अवक्षेपण, विग्रभ्, पद्मावती, एव, षडृच, प्रियकाम, संविज्ञान, विश्व्या, स्थायिन्, दुष्टभाव, नाडीचरण, विष्णुरूप, अवधि, सप्तविंशतितम, दुर्मुख, समुच्छ्वसित, यवन्, दिवाचारिन्, प्रत्यक्षता, सितमनस्, प्रतिग्रामम्, दशबन्ध, अमति, जलोदर, कपल, अपवर्त्, द्व्यशीति, प्रशंस्य, शणसूत्र, तङ्गण, अभिनिर्मा, मृगयु, हर्षवर्धन, समवृत्त, घृत, यूथपति, सितरक्त, सौभ, संयोग, दुरुपदेश, रोही, विमेघ, हेलि, निर्दहन, लम्पट, सुपथ, विज्ञाति, अम्बर, संवर्ध्, द्वारपिधान, दुराधर्ष, आस, व्याख्यातर्, खिद्र, वर्षासमय, प्रतिश्रव, सितमणि, प्रजावृद्धि, त्रिदण्ड, सह, मुरारि, विदरण, कौरव, द्विपेन्द्र, संप्राप्, मध्यमरात्र, चन्द्रांशु, नानादेशीय, सनिद्र, अन, बलि, अङ्कुरित, मालती, पिण्ड, अवात, मेधस्, न्युब्ज, क्षि, माध्वी, शुद्धभाव, विधम्, उपपात, निःषेचन, समीक्षण, विभाग, संरुष्ट, फालकृष्ट, संधा, सजन, न्यूनय, निर्जिह्व, विटप, धारु, रयिवन्त्, नीकाश, दिविगत, उत्कण्ठित, नितम्बस्थल, स्कम्भन, वारिवाह, हस्तरत्नावली, कुसुम्भ, निष्प्रयोजन, माक्षिक, गालन, अभिषिक्त, नगरजन, कुलिक, अनुधाव्, स्रावण, प्रधानतस्, निष्टानक, अनुरूप, जयध्वज, डम्ब्




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