संदर्शय्

संदर्शय्
संदर्शय् /saṅdarśay/ (caus. от संदर्श् )
1) показывать
2) объяснять




Случайная выборка слов

आह्वा, भारसाधिन्, प्रतियोधिन्, महाहव, सहस्रवलिश, साशंसम्, चिकीर्षित, सत्यवचन, लूता, सत्यगिर्, ऋणवन्त्, ब्रह्माद्य, पथिषु, स्त्रीधर्म, वरीमन्, व्यञ्जक, अपचर्, स्पश्, शचि, भ्रम, श्रौष्टि, पुष्पचाप, नीरद, जागरित, शावक, प्रेङ्खा, द्वेधा, विनाशिन्, विभागशस्, प्रबोधय्, वामतस्, आश्रयिन्, धनुस्, वरवर्णिनी, °मध्यवर्तिन्, संवच्, अधार्मिक, विलाशिन्, आभर्, सस्पृह, प्रयुध्, वृध, आयुक्त, कुलान्तकरण, प्रहति, दुर्भूत, दिवाकीर्ति, मनुष, प्रतिलम्भ, श्रीपर्वत, परोपग, तमस्, पूर्णमुष्टि, विमोक्षण, कान्ता, विनत, विमलय, अज्ञ, प्रशंस्य, परिमार्ग, अमित्रता, रिक्थाद, तामरस, अन्तिम, हस्तिदन्त, अलोभ, दुष्प्रसह, संनिपात्य, शुभमङ्गल, साकेत, नियतेन्द्रिय, ऊर्णायु, सिक्थ, वीष्, नर्कुटक, पीति, क्षुर, विधम्, मर्दिन्, खरांशु, चीत्कृति, श्वोवस्यस, भिक्षु, तर्ष्यावन्त्, माध्यस्थ, स्यन्दिन्, स्राविन्, ऋतावरी, प्रसारिन्, देवभक्ति, हवनस्यद्, बन्दिन्, ध्वंसन, परिकर्मन्, मत्त, मृगनाभि, सामग, श्रवस्, गरिष्ठ, जिजीविषु, क्ष्माभृत्, लोकत्रय, जील, युध्, डिङ्गर, वनिन, निवेष्ट, श्मश्रुकर्मन्, स्थिरता, प्ररुध्, गत, वधत्र, दंष्ट्र, लोकेश्वर, परिव्यय, प्रामञ्जनि, पदबन्ध, पौरोगव, हरिश्मश्रु, जघन, यज्ञहुत्, धूनय्, मध्यस्थ, अत्रप, इन, परिचारिका, मथिन्, ब्रह्मदेय, उत्सर्ज्, पाटलय, निधन, आनन्दगिरि, जिह्वा, मुञ्जमय, अमेध्य, आघृणि, न्युब्ज, इहस्थ, दिङ्मण्डल, विप्रस्थित, °वासनामय, संधम्, °प्री, कमलनेत्र, मर्ध्, पन्यंस्, समसर्वगुण, दामोदर, इन्द्रजा, तमस्वन्त्, परलोक, विष्णुपुराण, वैरहत्य, जयद, अत्याहित, दशार्ह, चुल्ल, शिष्ट, वनिष्ठु, मेरुकूट, श्रेष्ट्हिन्, मित्रिन्, मायिक, भ्रातृव्यवन्त्, यज्ञकाम, क+ठ, गोपेश, श्ववन्त्, पारसी, किर्मिर, शार्दूल, °शङ्किन्, अपतिका, वैकृत्य, पक्षस्, उपसंव्रज्, गोपेन्द्र, नर्म, अभिनिविश्, शलाटु, मृत्तिका, धनवर्जित, पद्मवर्ण, धूमाय, लेशतस्, फुल्ल्, जायुक, नियोग्य, अश्रद्धेय, सार्थ, गृहपत्नी, अवेक्षण, एकार, मातृका, प्रणपात्, विष्टार, श्मग्रु, नर्तनागार, परिगणन, यजत्र, उदय, अभियाच्, अध्रुव, कलीयक, हिमाराति, भीमल, माद्रवती




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit


мастер на час минск, литовский словарь