संतर्प्

संतर्प्
संतर्प् /saṅtarp/ (формы см. तर्प् )
1) подкрепляться; насыщаться
2) освежаться




Случайная выборка слов

सपद्म, प्रवृत्ति, भृमि, कैकेयी, धानन्, असज्जन, शाब्द, अदस्, पारतन्त्र्य, अनुसंव्रज्, प्रभावतस्, वाहस, प्रधन, राजपुरुष, द्रविणोदस्, घर्मकाल, हीनपक्ष, कुशिक, परेप्राण, असंनिधान, चतुर्भाग, इष्टनि, हस्तादान, भाष्, श्रम्, सुमित्र्य, निष्कारण, पृषत्, भीम, त्रैवेदिक, संनर्द्, °रुह, सौवीर, राहुग्रह, सौवर, संसेव्, मिलित, विश्रावय्, पयोवृध्, बम्भारव, भामित, कृपा, प्रदिह्, वासतेय, संजीव, ईप्सित, वेधन, शिरोरुजा, पताकांशुक, राज्यसुख, तृणप्राय, एवंगुणोपेत, वृन्दार, मङ्गलीय, विशोषिन्, उपकार, आकल्प, अभिसार, भूषय्, सीमावाद, परिग्रहीतर्, निरपेक्षा, पार्ष्णी, दोग्ध्री, मनस्मय, प्राचीमूल, बोधय्, महारव, अभूति, रुशन्त्, °मूर्ध, अश्वावन्त्, उत्तरदायक, मानवदेव, रोमहर्ष, अभिघर्, राजपत्नी, प्रहेला, रज्जुमय, समावर्त, पुञ्ज, प्रतिभान, कपोत, सूर्यरश्मि, प्रातःसवन, ओम्यावन्त्, सुग्रीव, आदित्यपुराण, तोयाञ्जलि, प्रतिदिवसम्, अविषय, समायोग, प्राञ्जलि, सूद्, दौहदिक, तटाकिनी, काश्यप, विसृत्वर, पराजिष्णु, चटुल, विश्वतूर्ति, व्रणिल, परिनिष्ठित, द्रविड, कक्षा, पथाम्, सुखोषित, विकर्त्, छादक, निशाहस, पर्युपस्था, विहित, अभूत, अवस्त्र, विनेत्र, परिपाण्डु, जुष्, संप्रीति, सिद्धाश्रम, सिद्धिज्ञान, तारिणी, अर्चन, शीतली कर्, माथक, भगदेवत, नागरता, व्यपेक्ष्, पिशङ्ग, रुशद्गु, सुखाभ्युदयिक, त्रिषाहस्र, अवबोध, ऋच्, निकुञ्ज, हेममय, नयशालिन्, देवपात्र, चिरन्तन, संयमन, हनुल, खण्डन, मज्जा, ओकार, प्रादोष, वाचयितर्, प्रणुद्, विवर्, खनित्र, विरोक, अव्यग्र, अवतार, वाक्संयम, देहेश्वर, भाण्ड, साढ, संभञ्ज्, मन्दिन्, संनिधा, अतिभूरि0, क्षौर, कलुषमति, प्रतिसंसर्ग, अप्रयुच्छन्त्, कूर्च, स्थेष्ठ, और्ध्वदेहिक, पार्श्वपरिवर्तिन्, मदीय, समुन्नम्, निर्णाम, दयित, कार, चैत्यद्रुम, शक्वर, दिव्याकृति, वैरी भू, वेन्, लोह, उपराग, दलन, उष्णरश्मि, टाल, नैषधीयचरित, श्लोण्, महोदर, विवृत्ति, अरिक्त, पुण्ड्र, सिताम्बर, राक्षस, सुभुज, खल्व, दुश्चर, परामर्श, महासार, विष्, रेकु, प्राश्, दशानन, तरला, परिणीत, त्र्यश्र, अकव, बाधन, त्रिपथगा, हविर्भुज्, विज्ञापय्




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit


мастер на час минск, литовский словарь