सर्वविद्य

सर्वविद्य
सर्वविद्य /sarva-vidya/ см. सर्वविद्




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सर्पेश्वर, उपदेश, यज्ञभूमि, सत्यगिर्, भवभूति, कुण्ठ, वृष्ण्य, द्रविणोदस्, प्रत्येतव्य, श्रथ्, उच्छ्रित, व्रजन, नाशिन्, इतिकर्तव्यता, वेदविद्वस्, शशक, समन्त, पुत्रकृथ, अक्ष्, दण्डानीक, नित्यशय, दितिज, नार्यङ्ग, सिक्थ, उपहित, जनिमन्त्, ब्राह्मणभोजन, जल्पक, प्रियकर, दिदृक्षु, सर्वतोमुख, प्रोथ, भन्दिष्ठ, निर्दण्ड, पितृतस्, प्रतिबिम्ब, द्वंद्वशस्, उत्कर्ण, परिणाह, वृत्तौजस्, कल्य, प्रव्यक्ति, निस्वन, °धन्व, प्रासादतल, जातिमन्त्, क्रम्, उलूक, शैथिल्य, पाण्डर, दीर्घप्रयज्यु, आपूर्ण, क्ल्+प्ति, आश्वत्थ, विस्रंसय्, षोडशम, पुटिका, आपस्, सप्तचक्र, स्वादन, संमुखीन, गिरिव्रज, क्लान्त, स्वरुचि, प्रास्, त्रिषष्, सरोजिनी, देवया, कलविङ्क, परस्पर, मिहिर, विकर्षण, कालिमन्, ओकस्, प्रत्युद्गम, मन्द्र, जिह्मता, सहिष्णु, प्रस्वापय्, अण्वी, वितत्व, न्यस्य, अप्रजस्, अतिदुर्वृत्त, उकार, समर्पण, पापकर्मन्, क्षेमयन्त्, वर्ष्या, दत्त, अपराह्ण, स्तिमित, निरुक्त, पञ्जर, केनेषितोपनिषद्, गोहन्तर्, अप्रतिबुद्ध, अपयु, निर्घृणत्व, परिवत्सर, माणवक, उदार, प्रवर, पुष्टाङ्ग, एने, भुज्मन्, तामिस्र, हस्ताभरण, भक्ष, सावर्ण, जीवमय, नगर, दीप्तकिरण, देहज, विलोकन, दुर्मित्रिय, ओज्मन्, तर्जन, संस्राव, आहनन, चत्वार्, उरस्, आकल्पम्, जयघोषणा, अहो, छगल, प्राहुण, आरम्, साधुवादिन्, क्षौरकर्मन्, प्रत्यक्षदर्शिन्, निर्व्याघ्र, चरणविक्षेप, सोमदेव, पदज्ञा, उपभुज्, अनुयाच्, कूची, प्रतिकृत, गर्भगत, सि, भरतमल्लिक, स्थापत्य, सभासाह, क्षयकर, सिसृक्षु, सार्थकत्व, संरोपण, तर्पणी, प्रत्यासन्नत्, दीक्ष्, महाकाव्य, चापाधिरोपण, रैवत, प्रीतिसंगति, स्वेच्छा, अम्, रक्षोहन्, वर्षशतवृत्त, त्रिदशपति, कम्र, आर्यावर्त, निष्पू, संवस्, पृष्ठ, नीलरत्न, अतिसूक्ष्म, अभिप्रनु, उपब्रू, सायक, दुरोण, विषघ्न, संनहन, कादम्ब, ऋतुकाल, दन्तजन्मन्, प्रविष्टक, विषिन्, यातव्य, प्रमातामह, प्रक्षालन, गात्र, श्यामाक, अतिमुखर, बर्ह्, निरारम्भ, शौर्य, नैर्गुण्य, दुर्विधि, अनुहर्, शक, समयोचित, पुरुष, महापातक, धर्मभृत्, वनमाला, न्यायवन्त्, व्यवहर्तर्, जिगीषा, ऐश्वर्य, अवधान, उद्दिश्, अभिषु, अवखाद, मदि, पल्ली, दुराक्रन्द
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