शक्तर्

शक्तर्
शक्तर् /śaktar/
1. носящий, переносящий
2. m.
1) носильщик
2) страдалец




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कौल, अतिदाह, समदन, क्षयकर, यजि, धर्ष्, बुध्, प्रसिच्, उच्चसंश्रय, अनुप्रवचनीय, अश्वानीक, धकार, अजेय, किंभृत्य, लक्षी कर्, ऊर्जस्वल, स्त्रीगमन, निर्मम, तुल्यजातीय, प्रधर्ष्, राजवंश, नाविन्, कवचधर, पुरी, तिलतैल, द्युमन्त्, दण्डन, अपधाव्, भास्, प्रायण, फलवन्त्, प्रदीप, आञ्जनगन्धि, रुप्, सिरी, दुरवगाह, हस्तिन्, निर्वाद, धात्रेयिका, दयावन्त्, यज्ञभूमि, जहु, स्वातन्त्र्य, वडवा, मुकुन्द, वियोगिन्, रेतिन्, विभूषणवन्त्, सप्ताङ्ग, पार्ष्णी, वीड्वङ्ग, दग्ध, हेय, नभोमण्डल, जिन्व्, आयति, समुदीरय्, भ्राजिष्ठ, वर्त्मन्, उदन्, संददि, प्रतिराज, निष्पत्त्रक, स्तम्, व्यूढोरस्क, सचाभू, याशु, त्रयोनवति, ढोल, युक्तत्व, पुनःपाक, अवन्ति, परिणेतर्, आयुत, मुर्मुर, त्र्यक्षर, विटप, गृत्समद, सुरगृह, अङ्गुरि, न्यर्ण, शैघ्र, योगशास्त्र, धनु, निर्भञ्ज्, पुष्कल, कालज्ञ, प्रतिगर्ज्, शुन्ध्, द्वित, सुसित, संग, अतृप्णुवन्त्, निर्झर, माधविका, ग्लानि, वृद्धिद, सर, संधि, वक्व, वाजदा, मेघकाल, सुभ्रू, विस्तीर्ण, वृत्, कारणात्मन्, विचिकित्सन, प्रतिषेद्धर्, प्रतिबल, पुत्रकार्य, दुःखयन्त्र, तोयराज्, निशान्त, स्वाकृति, दी, सस्वन, अरुन्धती, वीथिका, शाब्द, वत्सर, शत्रुजित्, धूमकेतन, अतिसद्, गोल, मध्यस्थित, विभाव, प्ररोचय्, तन्त्रवाय, निःशुक्र, कण्डु, प्रतिक्षोणिभृत्, अर्थवत्ता, अनुष्ठान, विभज्, द्रुममय, निर्घण्टुक, दीनार, प्रद्रव, यम-सू, शिल्प, एकजात, गुडोदक, ईर्ष्यु, रन्तिदेव, सार्वलौकिक, वत्सल, संसिव्, शर, सादिन्, द्रावण, विद्, त्र्यक्षन्, दृगन्त, अमन्द, अपरी, अमरसिंह, कुथ, पुरोवात, आक्रन्दन, दर्शन, मायावती, अभिसंस्वर्, भूमि, परुषवादिन्, सजूष्, त्रयधा, विसू, धर्मोपदेशना, समाराधन, महौजस्, पीनायतककुद्मन्त्, पेषक, गोप्त्री, भैक्षाहार, पथिभिस्, गृहदीप्ति, आर्षेय, चञ्चू, विश्वगूर्ति, स्वतस्, °मुखीय, वेण, असजात्य, व्याव्यध्, समनुमन्, उल्लास, वणिक्सुता, नगोदर, यत्हावशम्, तारका, विसृत्वर, उद्वस्, पूल, प्रचर्, सह्यंस्, जिहीर्ष्, महीनाथ, अनिर्वेद, जनता, परिक्षेप, बान्धक, निर्यातन, स्तोम्य, प्रह्लाद्, कुतूहल, चातुर्विद्य, पाषाण




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