प्रश्रि

प्रश्रि
प्रश्रि /praśri/ (формы см. श्रि )
1) прислонять
2) устанавливать; расставлять




Случайная выборка слов

शिफा, वशंवद, सायक, संक्रोश, विभ्रंश, सरोष, ऊधन्, इष्मिन्, उद्वह्, सीमावाद, स्तनय्, प्रशस्, उपसद्, मुद्गर, नभश्चरी, प्रयज्, सयुज्, आयान, झरी, गृहाश्रम, शृङ्गाय, क्षम्य, अग्रिम, गुह्, जात्य, गेह, सत्यता, दान, सहवासिन्, बन्दिग्रह, अप्रतिहार्य, विपत्ति, जीर्णता, पङ्क्ती, दान्त, स्वयम्, विराम, उपयान, दम्भोलि, सबर्दुघा, शलातुर, विष्णुरूप, प्रष्ठ, उपान्तिक, अन्तरङ्ग, दिश्, पापकृत, कश्मीर, भ्रशीयंस्, जड, प्रसह्, वैरस्य, सचित्त, हस्तिक, वर्षपूग, धृति, स्थापनीय, दानवन्त्, विवत्स, वृति, अनन्त, सुरुङ्गा, नन्दन्ती, द्युति, प्रादेशिन्, मिष्, जितेन्द्रिय, शिवायतन, सविकल्प, धर्मज्ञान, देवव्रत, पर्येष्टव्य, अभिलीन, प्रस्फुट, ऊर्ध्वगमनवन्त्, सुसमाहित, पुरौष्णिह्, ऋतुथा, प्रभासन, सादृश्य, तितिक्षु, छकार, पदन्यास, घृतनिर्णिज्, निर्णिज्, वाण, देवयाजिन्, निवेदन, °लोभिन्, विपरिणाम, °निर्वापक, वृन्तिका, विबाध, संव्यध्, अनुक्रमणिका, समावेश, शात्रव, दुर्मनस्कत्व, कुप्लव, अभिलप्, शङ्का, शठ्, आर्यागीति, वल्लभा, °द, प्रतियोग, ऐरावण, अनिर्देश, अभिमील्, , अगृहीत, सर्प्, अमरुशतक, आशुग, सविध, कुट्टिनी, विश्रथ्, स्रक्त्य, प्रध्वंसिन्, वशीकरण, मुख्यशस्, देवी, वरण, विराविन्, परासेध, नदीमातृक, वलीमन्त्, सार्थिक, सिसृक्षा, विघ्नकृत्, मन्थ, विश्वदानीम्, कपोल, दुष्प्रेक्ष, सशोक, अभिसंपद्, स्वर्गमन, शतमान, वक्रपाद, व्यवहारवन्त्, स्वप्नभाज्, रजनी, नृपीति, चतुःशत, पृथुता, ब्रह्मसत्त्र, स्वच्छन्दतस्, तपोलुब्ध, मूर्तिमन्त्, वाजिनीवन्त्, प्रजा, शरारि, आनुपूर्व, ध्यानतत्पुर, भयकृत्, उद्या, स्वर्णकार, संसर्पण, क्रुध्, अनन्विष्यन्त्, , भ्राजस्विन्, पुष्पकाल, कर्का, नायय्, निशीथिनीनाथ, भङ्ग, यथापूर्व, गुरुवास, प्रपश्, हितकृत्, विश्वगूर्त, अयस्, प्रणीति, व्यृद्धि, तिथि, नौचर, दृब्ध, पोथ, सत्त्वस्थ, शिष्य-रूपिन्, तिर्यग्योन, धीमन्त्, मिथःसमय, अनुरुध्, सीमन्तक, महामेघ, हस्तगत, आसव, अकण्टक, नैयायिक, °निन्दिन्, चन्दन, कुसुम, निष्क्रीति, माणविका, अभिलङ्घय्, सुकण्ठ, चरथ, अधस्तात्, लम्पट, प्रज्ञा, उरुगाय, अधन, रणक्षिति, ह्लीक, भस्मन्




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit


мастер на час минск, литовский словарь