धू

धू
धू /dhū/ (U. pr. /dhavati/ / /dhavate/—I; fut. /dhaviṣyati/ / /dhaviṣyate/; P. pr. /dhuvati/ — VI; fut. /dhuviṣyati/; U. pr. /dhūnoti/ / /dhūnute/ — V; fut. /dhoṣyati/ / /dhoṣyate/; U. pr. /dhunāti/ / /dhunīte/ — IX; fut. /dhaviṣyati/ / /dhavisyate/; pf. /dudhāva/ / /dudhuve/ (I, VI, V, IX), /dhū-nayāñ-cakāra/ / /-cakre/; aor. /adhāvīt/, /adha-viṣṭa/, /adhuvīt/ / /adhoṣṭa/, /adhūdhunat/; pp. /dhūta/, /dhūna/ (IX); inf. /dhavitum/, /dhuvi-tum/)
1) трясти, вытряхивать
2) двигать взад и вперёд
3) раздувать, разжигать (огонь)
4) удалять, устранять




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पुष्टिमन्त्, नारीष्ट, प्रियहित, अनुदिन°, वणिक्सुता, कुठार, निभीम, बीजवाप, सित, दुष्प्रापण, विलोठिन्, दुःखभाज्, अक्षरच्छन्दस्, क्षु, अतिकोप, सुपथ्, पूर्वसमुद्र, वर्चस्वन्त्, समयोचित, वपा, कुल्या, भक्तिवंस्, याज्ञिक, द्विविध, पापाचार, वनोद्देश, नयनोदबिन्दु, घृतप्रतीक, नास्तिक्य, दक्षपितर्, क्रन्द्, भीष्मक, शचिष्ठ, भ्रज्ज्, गुह्य, हिमवारि, स्थानक, पाश्चात्य, नर्मदातीर्थ, सूक्ष्मपाद, कठिन्, काञ्ची, निवेश, तिग्मतेजस्, अस्वतन्त्र, युगान्त, भवदीय, खजा, यदा, मुर्च्छ्, उत्पन्नबुद्धि, रम्यता, पौरलोक, इष्ट, अपिधा, सबहुमानम्, ब्रह्मवाच्, अवमानना, समर्यजित्, अधश्चरणावपात, कार्ष्ण, शुभकर, सरण्यु, प्रहासिन्, व्रण्य, अनुवा, सिंहशाव, प्रमातर, धर्मारण्य, ब्राह्मी, निरभिमान्, होराशास्त्र, वरुणालय, स्वर्गमन, उत्पतय्, पिक, सहीयंस्, तकु, अवस्थित, ज्रयस्, आश्रयिन्, आरब्ध, परिपूर्त, धैर्यवन्त्, प्रसन्नजल, मृजा, तन्तुमन्त्, प्रयुज्, शिबि, भरित, आतपत्र, आदेश, यथारूप, नैकविकल्प, नासामूल, अहित, स्वजन, नन्तर्, धन्य, शिशुक, गोयज्ञ, षड्विंशत्, अतिभू, विराध्, द्वारस्थ, निरुक्तवन्त्, गोभृत्, मूढचेतन, स्रुव, सौमनस्य, भ्रान्तिमन्त्, उद्गीति, पृष्ठ, दुर्धर्तु, तादीत्ना, सव्रण, अञ्जि, वर्षिन्, सैनान्य, सुतीक्ष्ण, समाया, अप्रणीत, भीतिमन्त्, दोरक, स्वन, त्रिस्, विजेतर्, शत्रु, सपद्म, प्रवत्, तास्कर्य, गोपन, वाण, पुरकोट्ट, खर्व्, भूयंस्, सुनस, कूर्पासक, उपस्त्हाय्, वासोद, अनिर्णीत, आगस्, हेमशङ्ख, दत्तशुल्का, परिवह्, प्रार्पण, अतिभूरि0, वधकाम्या, पौष्कर, सहभोजन, स्तब्धीभाव, कपीन्द्र, ऊर्म्य, प्रतिहतधी, द्वाररक्षिन्, अनिष्ट, अनुगम, नैसर्गिक, बृहत्सुम्न, नीडज, अतितेजस्विन्, चक्रवर्तिन्, भवभूति, विश्वतस्, श्रुतवन्त्, पङ्केरुह, धातुमन्त्, शेषस्, दशान्तरुष्य, निष्कासन, अमाय, संसृष्ट, षष्ठांशवृत्ति, अल्प, वेतण्ड, देवतात्, मर्ष्, सर्वशस्, निर्यापय्, ल्+कार, तत्त्वज्ञान, संभोज्य, कुटिलकेशी, विनाशक, अदृपित, सिद्धयोगिनी, शिष्य-रूपिन्, बृहद्गिरि, मोष, जम्भलिका, मौढ्य, गृहीति, विधिविपर्यय, सर्वदर्शन, निपुण, क्षौणी, सिद्धिमन्त्र, क्ष्माभृत्, मन्दुरा, शून्यचित्त, हिठ्, अभ्याधा, सपुलक, तोयवाह, साधनत्व, विहाय, प्रमृष्ट




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