संसर्प्

संसर्प्
संसर्प् /saṅsarp/ (фермы см. सर्प् )
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प्रबोधक, रिङ्गि, अनिष्ट, तक्ष्, अग्रु, पूर्वापरदिन, व्यतिरेक, तवस्वन्त्, तुला, निवर्तक, हीहीकार, प्रियजन, अतिभैरव, दक्षिणपूर्वा, अग्रमुख, क्षोभ, शूल्, संमत, उपोषण, सप्तजिह्व, अलोमक, निकृतिन्, वीरासन, उदक्य, समर्पण, यथायथम्, सोदर, उद्गीति, वाट्य, अनुकीर्तन, वेणु, अकुल, जलशयन, निन्दक, मृत्पात्र, माहेन्द्र, लेखपत्र, उद्योग, नदीधर, विष्णु, चक्षस्, सलोभ, स्ववशता, जुष्टि, आविद्ध, उद्रिन्, विचेष्टित, मैनिक, मकार, वैवर्ण्य, उपमेय, स्वज्, विस्पष्ट, वल्गितभ्रू, मार्गण, नकिंचिद्, संनर्द्, हारयष्टि, अतिकोपसमन्वित, अतिप्रसङ्ग, अन्वयिन्, वार्ष्णेय, राजभट, नीलपिङ्गल, वशित्व, संस्यूत, प्रबल, निर्मोचन, समीहा, सहर्ष, सेचय्, प्रत्यभिधा, मित्रकृति, प्रतिवचस्, चूर्ण, कठोपनिषद्, सुत, नर्मोक्ति, क्षम, प्रस्यन्द, असुररक्षस, मुह्, मिन्दा, रिख्, रात्रि, नग्नत्व, स्वसर्, मन्द्र, दुर्मनस्कत्व, अस्मासु, क्रिवि, नदीपति, सराजक, संधि, उष्णरश्मि, फेनप, कस्तूरी, प्रोक्त, वाम, संराग, उदीरण, त्वङ्ग्, स्वपस्, नमस्या, धन्वन्तरि, कण्ट्, सारिन्, मृ, पथिषु, सुवृष्टि, विश्वासन, उल्ब, बाहुता, रोचनावन्त्, वत्सपति, पटि, ग्राम्यता, मायावन्त्, त्र्यधिष्ठान, एकत्रिंशत्, उपप्रहि, मिथःसमवाय, परीक्षित्, सोमयज्ञ, निरन्वय, संयुत, मधुमय, निलय, अवकर, कक्षा, गर्त, प्रतिगज, तारिन्, क्षर, मरीमृश, नव्य, ब्राह्मी, जलेश्वर, प्रशंस्, वल्कवासस्, तृणाद, धवलिमन्, कात्यायनीय, संमद, श्रिया, रक्ताम्बर, कौक्षेयक, तन्त्र, प्रशंसक, उद्ग्रीव, रक्षोघ्न, क्षौणीधर, प्रतिबोध, क्षाल, पयोदुह्, सुखसुप्ति, भिक्षाचरण, प्रदीप्, बालचन्द्र, भूतार्थ, क्लेश्, पूषण, निर्विन्न, साचेय, प्रपालन, प्रसू, पुरूवसु, विसंवादिन्, प्रहार, दन्तुर, च्यौत्न, गोमय, तारुण्य, हृदयच्छिद्, प्रत्युक्ति, अपचार, दक्षिणत्रा, नन्द्, संवृद्धि, अद्यतनी, समनुज्ञापय्, क्षाति, स्वर्गस्थित, प्रव्ली, सुचक्षूस्, पुष्टाङ्ग, दविष्ठ, पितृलोक, प्रैष्य, सोत्सेक, उत्कर, न्यस्तदण्ड, पङ्गुत्वा, अकृतसत्कार, प्रमति, वसुधेय, म्रद्, अनिलसारथि, परिभ्रमण, पद्मगर्भ, अवस्था, दृषदुपला, धायय, असनाम, यथेच्छ, सुखासीन, प्रातराश
сборка мебели, литовский словарь




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