अनुज्ञापय्

अनुज्ञापय्
अनुज्ञापय् /anujñāpay/ (caus. от अनुज्ञा I )
1) просить разрешения
2) прощаться с кем-л. (Acc. )




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सारफल्गुत्व, हेमकर्तर्, समुत्पन्न, उच्छ्रय, सयावक, सुप्रीत, कर्कोट, संवप्, निरिङ्ग, वृष्टिपात, मनोज्ञ, सदसन्त्, भ्रातृव्य, वियोगिता, सामग्र्य, सौभ, मातृष्वसेय, स्मेर, रथमुख, निण्य, ब्रह्मरक्षस्, चुलुक, अमूल, द्विवर्ष, धीर, पृष्ठक, कुन्तल, कर्मठ, उत्सर्ग, दिङ्मुख, निमय, चेष्टित, निरर्गल, प्रतिवर्ष्, विलक्ष, औत्पातिक, उदर्क, अध्यास, शीघ्रचार, भ्रेष, निचृत्, प्रतिगर्ज्, अष्टासप्तति, एतादृक्ष, आवरण, पीडित, साची कर्, नाशय्, आरम्, सुमधुर, कु°, त्रपु, ब्रह्मदेय, अत्, मदुघ, अविनाशिन्, यज्ञकाम, मानाधिक, आहनस्, स्थानान्तर, कलहंस, अविष, तना, संगमन, मन्दी भू, आव्यध्, उपाख्यान, मित्रसंप्राप्ति, प्रयत, सामन्, परोऽक्ष, प्राग्वात, प्रियालापिन्, मधुमय, सीरा, सुमुख, भयार्त, अनुवंश, शीतार्त, निर्ज्ञान, संचय, अक्षरविन्यास, संक्षेपक, युवाभ्याम्, कुशूल, मुर्मुर, निपुणता, अघ्न्य, अभियुध्, कृपावन्त्, भूमिधर, बटु, कुमारीभाग, यौवनवन्त्, राजपुमंस्, लोकोत्तर, समालोक, जलचर, चमू, पञ्चाशत्, सर्वनाश, कल्पपादप, उद्वेग, जगतीपल, लोहज, कुलनारी, सनिन्द, कला, परिकत्हा, दुर्हणायु, आप्य, विश्रम्भिन्, सर्वसिद्धार्थ, हेलन, सेनापति, °व्याहारिन्, यथापूर्व, न्यस्तशस्त्र, पाल्, अनुपभोग्य, तायु, रतिमन्त्, सखित्व, शिबिर, मुग्धाक्षी, रुक्म, तिग्मतेजन, लोभनिय, प्रह्लादन, भट्टिकाव्य, सहवत्स, सविस्तर, दूतिका, उरु, कीन, चरक, सृभ्, संधुक्षण, उख्य, ह्वान, स्थायिता, मध्यमक, महानाद, संरञ्ज्, एकदेश, अधी, टु, सुदिनत्व, विवर्ण, धीर्य, नृषद्, राकानिशा, कारना, छिद्, सनियम, महात्मन्, प्रस्पन्दन, आहि, दिवान्ध, प्रत्यादा, परशु, रत्नमाला, शठ, अविष्यु, उक्षण, विमोक, चिकुर, स्नेहमय, अद्, विबाध, हारायण, स्त्रीहत्या, एतदर्थम्, अन्यथाभाव, परिकर, दक्षिणत्व, अभक्त, निर्विद्, षष्, रस, भिक्षाभाण्ड, हृदयेश्वर, उपरुध्, प्रकाशिता, निर्वह्, रेखान्यास, पुरुषसिंःअ, नाथ्, प्रविभज्, घर्मकाल, समान्या, चक्षुर्विषय, काञ्चीस्थान, अवसद्, निकेत, संस्कर्तर्, आत्मवध्या, नस्तस्, अभिहर्षय्, माषक, सुमेक, सदसत्फल, जप्य, धृतव्रत, शरण, दुर्जल, उपहितत्व




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