क्षि

क्षि
क्षि I /kṣi/ (P. pr. /kṣeti/—II, /kṣiyati/—VI; pf. /cikṣāya/ ) проживать, обитать, жить




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वंश, खातकीर्ति, अभिसंहित, प्रेक्षावन्त्, गोष्ठी, अनुदर्शय्, स्पृष्टि, असत्पुत्र, रूक्ष, क्री, वणिज्, प्ररोह, गार्हपत्य, संशुच्, दैत्यनिषूदन, त्रिधातु, पृथक्क्षेत्र, राशी भू, मन्मथानल, शुभ्, विज्ञा, अप्रतिपादन, स्वप्नया, तत्सख, सूद्, गोदोहन, साधुशब्द, क्रियालोप, दुष्प्रापण, त्रिवर्ष, पिन्व्, शूरत्व, वायव, द्वात्रिंशल्लक्षणिक, जैह्म्य, कन्य, दृष्टश्रुत, प्रवर्षण, अमन्द, नेत्री, अतिरम्य, सहस्रचक्षु, जलौक, वायुपुत्र, नैकरूप, भग, सविध, प्रजार्थे, साम्यता, शत्रुता, आश्रित, प्रोल्लस्, प्रातराश, श्रन्थ्, अपनम्, त्वच्, अगति, अपास्, उन्मद्, त्वत्°, हस्र, रोष, प्ररूढि, गर्ध, सत्कुल, अधिवक्तर्, परिमुह्, सामन्, तुलावन्त्, स्वेद, संनु, वर्षारात्रि, हविर्दान, शरीरज, उत्स, दा, तारय्, वाजिन, °रोहित्, संध्याकाल, उत्कर्त्, अश्वयुज्, प्रथमज, बाहव, यथाशास्त्रम्, मा, रत्नच्छाया, हेतुवाद, कुचरित्र, दशतय, संसू, हिरण्यपुर, ग्रहणान्त, छुबुक, द्विबाहु, दुः°, पङ्किल, साम°, मृदू भू, °लोमक, उपज्ञा, देवयज्ञ, चत्वारिंश, दुर्मन्तु, अदन्त्, प्रवादिन्, निःसंबाध, त्याजक, निनर्तिष, अवच्छेद, समिद्वन्त्, आत्मनाद्वितीय, चव्य, नवसप्तति, सागरक, वशीकृति, लोकवृत्त, सस्वेद, नाट्याचार्य, माघोन, संज्ञा, अमराचार्य, विमोचन, परिपूर्त, हर्ष्, क्रोधिन्, भरित, पारिहार्य, सदा, तादर्थ्य, जिन्व्, ग्रहणीय, अहस्त, दृष्टिक्षेप, वीतचिन्त, राजसुता, मूष, गोचर, सृज्, हस्तच्युति, प्रतिहर्, मलीमस, नैष्ठिक, वशी कर्, अनियम, उपबन्ध, दिग्जय, अपस्, बाढम्, चपला, निष्प्रभाव, श्राय, सूना, उदुम्बल, सुवासस्, खद्, तनूपान, द्वंद्वशस्, अन्तस्ताप, विमुग्धता, ह्रसिष्ठ, निचेतर्, शरण, परिविष्टि, आरम्भ, आरव, शमिन्, विश्रवस्, श्रवणीय, विनाश, पक्षगम, असाध्य, पिण्डक, विरिष्ट, भाष, पूर्वग, जग्मि, प्रक्लिन्न, एकैक, उन्नद्ध, कार्यसिद्धि, शिवमार्ग, स्फिट्, निक्वण, शतगुण, परिषद्, विप्रश्निक, विलस्, वीतजीवित, चन्द्रमस्, च्यु, विधर्, गोपालक, शूष, दोह, मानुष, अतिवद्, रथ, निधि, रि, सर्वतो°, दोषा, दृ, शम्बूक, मार्दव, अपवर्ज्, अजर्य
сборка мебели, литовский словарь




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