स्वर्ग-स्त्री

स्वर्ग-स्त्री
स्वर्ग-स्त्री /svarga-strī/ f. небесная дева, апсара




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सप्तपद्, सुखित्व, विलू, प्रश्रयवन्त्, केशबन्ध, विट्पति, दुर्मद, दाश्, ब्राह्मणत्व, पाश्चात्य, प्रतिकर, अरोग, सिन्दूर, दीर्घायुत्व, कृष्णी, बन्दीकृत, दुर्गाध, स्थाली, मन्त्राधिराज, वसुदेय, सुस्थ, सिद्धिकर, मेण्ठ, क्षैत, निली, सुषम, धनदण्ड, विषमय, गाण्डिव, विकास, कामिता, हैहय, बन्ध्, न्यायविद्या, हेमचन्द्र, निरीक्षा, मधुमय, अन्तर्वती, विध्, °रजस्क, पारमेष्ठ्य, दुवस्यु, लोकरञ्जन, विनिश्चि, शिक्षु, नृषद्, उपकर्, घोट, नास्तिक्य, भामिन्, निर्यत्न, कुठारिक, पुंनपुंसक, परिणामिन्, विरल, अश्वावन्त्, सान्द्रता, दुल्, विचरित, बलसमूह, परिवस्, उद्वह्, संकृष्ट, समासद्, भ्रम, दोषातन, संछिद्, पुराजा, शील, मुच्, निरूपिति, तेजोवन्त्, गाधि, सर्पराज, अमर्धन्त्, पीव, स्वधा, आदिभूत, हृदिस्थ, भामिनी, संप्राप्ति, संस्मृति, परिमल, याथातथ्यतस्, सप्रतिबन्ध, सोन्माद, उद्भिद्, बाहव, तृणप्राय, मुखवर्ण, अलाबु, शम्भु, परिवेदन, उन्मथ्, ब्रह्माण्ड, गरल, रोदस्, कासार, दुर्नय, भ्राजिन्, वेतस, समनस्, कन्यात्व, हवनी, दुःशिक्षित, फेट्कार, , बन्ध, चित्तिन्, संग्रहिन्, द्युचर, अनुशास्, सुधारा, वृष्ट, महानाग, तोयमय, रात्रि, रत्न, अनुरागिन्, प्रसविन्, पुत्रवती, तन्मय, अष्टवर्ष, जनित्र, गञ्जा, विज्ञातर्, प्रयत, सौप्तिक, स्वयंवृत, टु, नवाक्षर, शाङ्खायन, रञ्जन, कुक्कुर, व्यतिरिच्, काङ्क्षा, श्रावस्त, सांयुगीन, सुखस्थ, क्षण, सर्ज्, संकर्ष्, °वह्, प्रतिसंधा, पाप, विस्रगन्ध, दर्शन, प्ररुह्, पुरा, मुद्, उत्सर्जन, रोमण्वन्त्, वैषम्य, प्रक्षेपण, निविश्, सावलेप, चारुप्रतीक, नाडीचरण, वैशिष्ट्य, अनग्नि, ईर्ष्यावन्त्, बृगल, पञ्चदशकृत्वस्, वृन्दारक, पद्माक्ष, भ्रमि, वेदता, कात्यायन, समवसर्, निर्मिति, रक्षस्विन्, भौरिक, अतिबाध्, मृष्ट, तैष, आबन्ध्, उत्पन्न, अभिषिक्त, सुदिनत्व, अङ्गीकार, नरेश, दस्, ऐतरेय, भूमी, निरुद्विग्न, वैरकारिन्, स्वाध्यायवन्त्, उपोद्घात, मिथत्या, दुर्दृश्, जूर्णी, शुप्ति, संताप, लिप्ता, धनुर्भृत्, बाधक, प्रतिग्रह, भ्रंश्, इर्य, चित्रवन्त्, वेतण्ड, सौगत, आत्मज्ञ, प्रमन्यु, अमेध्य, नृपसुत, पूर्णपात्र




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