गुप्

गुप्
गुप् II /gup/ (P. pr. /gupyati/ — IV; pf. /jugopa/; aor. /agupat/; pp. /gupita/) смущать




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प्रजाध्यक्ष, प्रमिति, टांकारित, वसुधेय, विशातन, भुज, उच्चसंश्रय, दर्पज, मैनिक, आतत, समाव्यध्, सुखोपविष्ट, शववाह, परकार्य, विरुज्, प्राधीत, विराज्, महिमय, जाम्बूनदमय, सापत्न्य, निष्कृत, इध्, मृषा, पन्था, ईश्वरता, पितृदेवता, यति, गुरु, दुर्भाष, अंशुकान्त, समुत्क, उच्, भिक्षापात्र, खादिर, आपीड, साद, शाक्यमुनि, रुद्रिय, तृण, वसुर, उत्प्रेक्ष्, पुरोडाश्, आञ्जनगन्धि, रोहित, पितर्, अग्निद, करा, न्यक्कार, शुभाचार, महिमन्त्, बाला, परिकीर्तन, प्रतिलभ्, कुयव, किनाश, तपस्य, जलशायिन्, सारल्य, देवयान, सततयायिन्, सायंकालीन, तुच्छत्व, रतिज्ञ, जन्तु, इत्थम्, अभिधाव्, वार्षिक्य, बलसमूह, विषमय, मध्यस्थता, गीथा, अचिन्ता, यावत्, प्रियैषिन्, एकादशम, नेजन, रत्निन्, दाद, शक्यता, गुणान्वित, पूर्वपुरुष, उपजाप, अवधू, एषणा, संक्षय, एवमादि, वीरवर, गुणभूत, त्रयस्त्रिंशत्, मर्मग, अपदेश, तैर्यग्योनि, अभिन्न, दशगुणित, अहर्निश, विलुप्, तपनी, तायन, जिष्णु, दत्रवन्त्, मानना, कुब्ज, निरोद्धर्, ऋघावन्त्, अरणी, दारुमय, त्रपु, कार्कश्य, न्यास, संदर्श, मनायु, जलभाजन, मदावन्त्, धूर्ति, भस्मीभाव, प्रकाशिता, यक्षिन्, वेगवन्त्, वाजदा, विशङ्का, तूष्णीम्, रक्षस्, ह्रदिनी, स्तोक, रोचक, क्रियाकुल, भ्रामिर, निरनुनासिक, दीर्घायुष्ट्व, निराकार, वनोपेत, निष्क्रण, श्मश्रुकर, अधियज्ञ, परिमोष, भिषज्या, जातुषी, फुत्, फल्, प्रियाख्य, अष्टभाग, मुग्ध, प्रतिष्ठान, विवेकित्व, अल्पभाग्य, सुखिन्, मुनिवर, भास्मन, रोचन, स्वरयोग, राजसुत, व्यथन, प्रेक्षासमाज, प्याय्, कर्पण, संशय, प्रमत्त, परिसर्पण, अग्रिय, शतार्ध, मेध्यता, प्रतिनिर्यत्, फुल्ल्, निष्परामर्श, नृचक्षस्, धीरभाव, नभीत, पत्त्ररथ, पवित्रवन्त्, राजोपसेविन्, साध्वी, कदम्ब, विक्रय, अतिवाद, ऐषीक, हार्दिन्, मरीचिमालिन्, नतराम्, देवहिति, एणनेत्रा, रसवत्ता, तिग्मेषु, गान्धर्वविधि, गान्धर्वविवाह, अवनिप, प्रकर्मन्, धनुष्मन्त्, गृहजन, महानिशा, अमर, अह, मच्छ, कठोर, तत्रस्थ, मनोमय, धुरंधर, शीकर, नीतिमन्त्, मृगतृष्णा, अभिमुख, वैषुवत, दमन, जात्यन्धबधिर, विलिश्, वृषण्य, योग, उच्चि, घर्घर
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