संप्रयोग

संप्रयोग
संप्रयोग /saṁprayoga/ m.
1) обычай
2) объединение, связь
3) применение, употребление




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विभु, लघिष्ठ, नामथा, सत्यशवस्, त्विषि, प्रलप्, युवाम्, धूमिन्, अनुपपत्ति, चरितार्थ, यज्ञिन्, सुपाणि, साङ्ग, प्रदोष, तविषीयु, निष्प्रज्ञ, दूरेचर, सभिक, तर्जित, देवपुत्र, घुण्, स्वन, अविदित, अविश्वास, रणकृत्, संनर्द्, चतुर, कुन्थ्, भुज्यु, व्यासञ्ज्, वृकति, कक्ष, मधुमास, कर्त, वीतशोक, सप्तथ, भूर्ज, वासवदत्ता, यौगिक, नामनिधान, यजनीय, एकचित्त, विहार, धारण, ऐकान्त्य, दघ्, वातात्मज, त्रयस्सप्तति, घटिका, जम्बुमालिन्, विंशक, हत्या, आभिजात्य, तिलपर्ण, जलौक, प्रतिवन्द्, मनुस्मृति, ग्रामणी, समाहित, धूर्ति, विष्कम्भ, राति, द्वयु, धूमध्वज, वञ्चनवन्त्, नौतार्य, सेनाग्र, रथवाह, रङ्गावतारक, इरावती, सुजन, सपत्नसाह, अन्न, प्रतिभुज्, दुवस्, अक्षपटल, चित्रलिखन, राष्ट्र, प्रपद्, उन्मनस्, जाल, नरव्याघ्र, ऋषभ, सकषाय, सिता, मध्यचारिन्, निर्लुड्, विषय, उत्तरौष्ठ, शूरत्व, कार्त्तिक, शैक्यायस, आयुर्वेद, पिपासन्त्, प्रतर्दन, हिरण्यकेश, निःसर्, सहधर्मचरी, उपसंव्रज्, चाक्ष्म, संनी, चन्द्रगुप्त, शारदा, पद्मिनीपत्त्र, सयुज्, पूर्वदिश्, आपीड, विधेयी कर्, संनिविष्ट, पल्पूलन, कर्षिन्, गुणवन्त्, स्मत्, समश्नुव, वा, गोपीथ, पवित्रारोहण, समानप्रतिपत्ति, गृत्समद, क्षुर, लङ्घ्, परिदर्श्, अपग्रह्, पदन्यास, साक्षी, पनितर्, वीति, निद्रागम, अदून, सुपूर्ण, प्रत्यभिघारण, चकोर, पारत, नामशेष, श्वाशुर, विनिर्गम्, कोशपेटक, नग्नी कर्, प्राणनिग्रह, देहज, चञ्चु, वाशक, समानी, पुनर्भू, विलेपिन्, प्रमोह, प्रथीयंस्, भारसाधन, ससुर, मातृवत्, भरत, मन्थ्, आराधयितर्, अभिविपश्, लुप्, नरपाल, स्फुट, द्यूतवृत्ति, सुधार, देवत्व, रुजाकर, सुरत्न, कापाल, निवर्तिका, संस्रव, बृहद्देवला, निराकाङ्क्षिन्, कल्याणाभिनिवेशिन्, अभिमुखीभू, वार्षिक, दौर्बल्य, शातकुम्भ, भस्त्रा, चेत्तर्, शताधिक, भैक्षाहार, चैत्य, दुरपवाद, छत्त्रवन्त्, घातुक, अविषयीकरण, समूह, हल्, जनस्, संमह्, निःस्नेह, चण्डी, शान्तिभाजन, दुःखशील, धनवर्जित, वज्र, दुरधिग, अन्धक, पुरो°, गतजीव, वृषन्, मिमिक्षु, ज्योतिर्विद्, धायस्, धीवन्, रतिज्ञ, दुरुपदेश, यदी, छेद्य, किराट, निरधिष्ठान, उत्पाद
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