कील्

कील्
कील् /kīl/ (Р. pr. /kīlati/—I; pf. /cikīla/; aor. /akīlīt/)
1) связывать
2) сдерживать




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परिभाषिन्, निखन्, नप्तर्, नखायुध, नैकशस्, ललिलविस्तर, कृच्छ्रगत, संरुज्, शीर, ज्येष्ठतरा, पदपाठ, सुरश्मि, कल्माष, सैन्य, द्युमन्त्, कस्माद्, विटपिन्, विपर्यास, भुरण्यु, महीयु, पाथस्, अविशिष्टत्व, तमस्वती, दामोदर, साकं°, वीरय्, गुह्यक, सूचिपत्त्र, आगम्, शराव, उदावह्, प्रिय-दर्शिन्, श्वेत्य, संतर्, मारमोहित, सारफल्गुत्व, कर्मकृत्, घु, षड्गुण, एव, ग्लै, महाकाय, सरस्, युक्तार्थ, विभूषण, शैख, प्रतिनिपात, नखाङ्क, श्राद्धिक, तुच्छ, आदेश, गोकर्ण, सामयाचारिक, वैदेश्य, विस्यन्द्, विभेदिन्, वास्त्व, दासजीवन, वृन्दिष्ठ, निर्लोभ, मी, नाटी, सचि, रक्षण, वीक्षण, अल्पिष्ठ, समाराध्, संक्षेपक, भासस्, अद्यतनी, शिबिका, ढोल, विमथ्, कुञ्ची, महर्षभ, आपर्च्, आपस्, अभिगा, स्कन्ध, परिचरण, देवकृत, वितन्, शुभ्, शिपिविष्ट, विहीय, सुभूति, कार्यकाल, पाटलय, स्रंसन, परीक्षा, जाहक, हारहूण, सुपुष्पित, उपरम्, त्रिककुद्, जलवन्त्, हय-मेध, आयाति, रासन, निन्दक, प्रियव्रत, आपर्, वस्तु, तादृग्गुण, दुध्र, विधर्षय्, प्रस्निग्ध, प्रतियोधिन्, जुगुप्सित, स्तवथ, महीन्द्रेन्द्र, मृगीदृश्, नक्, भृगुतुङ्ग, चिर्भट, मुनिवर, प्रतिभा, सुपार, पुनर्, नागरक, झंकार, शीलन, वाजसनेयिसंहिता, संनिवस्, समारोहय्, आध्माता, अपहा, वत्सपति, दशगुण, रण, स्वल्पक, पुलह, बौद्धमत, प्रवहणभङ्ग, नाटक, शावक, पौच्छ, कुञ्जर, ईश्वरता, आयज्, अनुपपन्न, सानुताप, रण्डा, वनगमन, निगु, विशृङ्ग, महाघोर, अद्रिसारमय, सप्रज्ञ, कदल, अवनि, प्रणयिता, आविद्ध, दैव्य, समाधि, कलिल, प्रतिबल, दिनाधिनाथ, अलोमक, समालक्ष्, रु, नाभाग, अपाकर्, वल्गा, मनसिज, वीर्यवन्त्, प्रहर्षण, पानीय, छन्दोवृत्त, प्रक्षेपण, पाप्मन्, सप्ति, आपस्तम्ब, अनुज्ञन, धाराश्रु, स्तोकशस्, संभोगशृङ्गार, कर्कट, वमथु, रुज्, नीरुज, भानवीय, हंसिका, सागरपर्यन्ता, जलजीविन्, चेष्ट, भगवती, दन्तशोधन, बीभत्सु, पुरुषमेध, कलाप, देवमनुष्य, स्विष्ट, संप्रवेश, विभ्राज्, दीपिका, उदकवन्त्, मूढबुद्धि, रसराज, एकमनस्, किंकरत्व, दिङ्नाग, व्यतीत, सुखसुप्ति, संप्रतिपत्ति, अतिविस्तर, अन्ततस्




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