नक्ष्

नक्ष्
नक्ष् /nakṣ/ (Р. pr. /nakṣati/ — I; pf. /nanak-ṣa/; aor. /anakṣīt/)
1) идти
2) достигать




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विप्रकृष्ट, संवत्सर, प्रव्राजिका, लघुता, अष्टन्, एकवचन, यज्ञशेष, वार्त्तिक, विदेवन, दुधि, विप्रयोग, किञ्चन्य, याग, सती, कीदृश्, यादस्, नविन्, क्षुधार्त, उपाश्लिष्, अक्षि, हंसकूट, पार्श्वतस्, हेमाभ, ठालिनी, पूर्ववयस्, प्रबन्ध्, नामधेयन्, अधन, सुसमाहित, विच्युत, प्यै, विक्रय, व्याख्या, उपसंव्यान, आर्यावर्त, तिल्विल, राजराज, तृषु, °रोहित्, तिलाम्बु, शत्रुहन्, निवासिन्, पुष्टिमन्त्, वैमूल्य, सोमवर्चस्, प्रत्यवाय, शप्त, विरूप, मार्ग, सहनीय, अवहा, भार्यावन्त्, ऊर्णायु, दुर्वसति, संशुष्क, सान्त्व्, नादिन्, निर्वच्, चोच, शीतमय, निर्हा, हवनस्यद्, लतागृह, ज्रम्भ्, पर्यय, सहित, वल, प्राथमकल्पिक, आञ्छ्, प्राबल्य, स्त्रीक्षीर, बहुपुत्र, त्रिगुण, ह्रसीयंस्, स्तोम, धर्म्य, याम्य, हासन, अवकर्त, भागिन्, युक्तरूप, अदब्ध, तेजोद्वय, ग्रावन्, बृहद्गिरि, अम्भस्, सत्करण, सुवर्चस, नकिंचन, शतद, स्नुषा, घातुक, सप्रणामम्, कालप्राप्त, विसंशय, दुर्जनाय, त्वेषस्, सुरस, पुथ्, कपर्दिन्, न्युब्ज, संमार्जन, भट्टारक, सहस्रकिरण, विरल, अयोमय, त्वच्, अद्मर, नीषह्, जागर्, शूद्रजन्मन्, देशय्, परिक्रम, सुलक्षण, अप्रतिमान, वसुर, पारावत, जयलक्ष्मी, रिच्, दासीभाव, चित्रन्यस्त, पाथोनाथ, तुङ्गत्व, सप्तदश, अभिविमर्ज्, निर्हर्, कायक, लोकोक्ति, चित्तानुवृत्ति, चक्षण, वहीयंस्, दैव, राजकन्यका, ओक्य, संबुध्, हैरण्यक, आव्यध्, समाप्तिक, प्रकर्मन्, मर्यक, वनलता, अध्यास, सध्यक्, वाहना, तारिणी, प्रतियोध, प्रवीण, वेप, प्रणयवन्त्, संभूति, पृथिवी, मृ, वारिपथ, मुकुट, लङ्, महीरुह्, चन्दनरस, सपत्नी, नक्षत्रविध्या, तटिनी, विभ्रान्ति, भिन्नार्थ, दृशीक, द्विपायिन्, चोदयित्री, श्वेतवत्सा, वर्षण, स्पन्दिन्, नकिम्, उस्र, हरदग्धमूर्ति, हयारोह, अविषादिन्, नाक्षत्रिक, अग्राह्य, यतम, महस्विन्, °विद्वेषक, अभिप्रेक्ष्, वाक्°, बहिर्गेहम्, अनुष्ठान, ठकार, पुत्रिका, अवस्फूर्ज्, अनुवा, नैकशस्, प्रत्ययकारक, दैवयोग, प्राची, मे, अतिगाह्, त्रिपिटक, तिन्तिड, पर्यपास्, संसद्, वेलाजल, सुशमि, नृत्य, पाल, सु, अन्वेषण, अतुल, वायुपुराण, क्लम्, केशिन्, फुत्कार




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