जन-राज्

जन-राज्
जन-राज् /jana-rāj/ m. царь




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घृताची, जम्भलिका, विजामि, त्रिलोकनाथ, प्रत्यक्, नैष्फल्य, मोटक, उदीष्, सृणि, अलर्क, प्ररोहिन्, हरेणु, वृष्णि, क्व, आक्रान्ति, प्रतिव्यध्, नमय्, छकार, प्रत्यक्ष, हासन, आर्षभ, सह, लोकतन्त्र, उद्देश, हेतुमन्त्, परोष्णिह्, स्वर्, प्रव्राजिन्, नमस्यु, नीलाश्मन्, प्रधानत्व, नष्ट, वेदनीय, तीक्ष्ण, निर्व्यूह्, स्वयंभु, विशाखदत्त, संभोगिन्, हि, निर्लेप, स्वादनीय, संस्थिति, ऊन, संदीप्, निषङ्ग, इन्द्रवंशा, युगपद्, मुख्य, प्रणी, ध्वर्, जघ्नि, आरे, निर्वचन, हिमान्त, कामतन्त्र, अजानन्त्, अनिलसारथि, वाल, शूरसेन, पांसुक्रीडन, वसन्तोत्सव, चतुर्वेद, पारत, अगाग्र, हेलि, प्रहर्स, सूर, रण्वित, प्रविविच्, परिवेषन, संप्रनश्, कुलीन, अधर्म, प्रतिशाखा, चतुश्चत्वारिंश, प्रतिषेधात्मक, सेलग, वाश्र, चीत्कार, निष्कुट, रिक्थग्राह, उपसंस्कर्, पुत्रकृथ, न्यायशास्त्र, निःशङ्क, रचयितर्, निरपेक्षिन्, पार्श्वतस्, बृहच्छोक, चलात्मन्, निरातपा, प्रत्यक्षता, तोयवन्त्, पार्वती, निर्व्यापार, अधर, प्रासादपृष्ट, समुद्रतीर, अप्राण, पर्षद्, ग्लुञ्च्, शून्यत्व, तुज्, देष्ण, परिशिष्, परोऽवरम्, स्वेच्छाचारिन्, पुरोरथ, व्यवहर्, वायुभक्ष्य, संतोष, विधुरत्व, व्यपेक्ष्, सनितर्, वस्न्य, शतमूर्धन्, रन्तिदेव, सर्वतोभद्र, शिरोधर, विद्युन्°, बलिकर्मन्, उपहारपाणि, द्व्यक्ष, °वन्द, परिमोषक, शेषत्व, आसञ्ज्, मघ, षड्वर्ग, भ्रूकुटीबन्ध, जीवनस्या, विशसन, एकदा, मायावाद, दुर्-आशा, छुरिका, प्रगुण, नीति, , यथाप्रप्त, अन्वालभ्, सोमविक्रयिन्, उद्ग्राह, नीरुच, बर्हापीड, पुरःसर, अपयु, पुत्र, सर्पसत्त्र, विभावन, कोरक, क्षुद्, चरितव्रत, पारिपन्थिक, दरिद्रा, चरक, विचक्ष्, कन्यात्व, शील्, शमितर्, नमस्, शीतांशु, शङ्क्, अदास, उत्फुल्ल, विष्टम्भन, पुण्यतीर्थ, धनू, परिदेविन्, विनिधा, अभिसर्ज्, वार्क्ष, पयोराशि, चारुहासिन्, हलाहल, सनिश्वासम्, एनेन, प्रतिनायक, ब्रह्मयोग, अत्युदात्त, तिर्यगायत, क्षेपन्, इरस्या, वरेण्य, तलव, मारव, संभार, धामन्, स्वर्गौकस्, दार्ढ्य, परुष्णी, संरोह, कठिन्, प्रतिसंहार, व्रत, मद्, महास्त्र, परपूरुष, प्रभविष्णु, मन्त्रित, अभ्युद्गम्, कौलिक, अतिमानिन्, आदितेय, पुरा, गीतनृत्य, अनुत्त




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