समाज

समाज
समाज /samāja/ m.
1) общество
2) толпа, сборище
3) встреча с (Gen., —о)




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आवऋस्, निरन्धस्, परिचर्या, वृध्, संप्रतिष्ठित, पिधित्सु, युवन्त्, भ्रूभेद, प्रादुष्करण, एकपद, कू, देववीति, हिमरश्मि, प्रवत्, बत, नीलीवर्ण, शृङ्गवन्त्, हिरण्य्वन्त्, याच्ञा, अञ्चल, निबर्हण, स्वर्वधू, विद्यामय, शाकुन, वृत्, अभ्युन्नत, रोध, भक्त, जलदक्षय, चतुरह, संलभ्, उपे, जडात्मन्, कुलाय, नह्, फलहक, दिवसक्षय, प्रभा, कातरता, वहन्ती, कालीन, याज्ञवल्क्यस्मृति, संकर्ष, व्रणवन्त्, समुपह्वा, उरा, भूप, विनिवृत्ति, प्रविभज्, सादिन्, केवल, प्रतिघातिन्, नभोमण्डल, प्रतिव्यध्, नदनु, समावह्, इन्द्रावरुण, संस्तर, कोरक, हारिद्र, मूष, देवमय, मुहुस्, ऊर्ध्वलोक, शठ्, वरवर्णिन्, अपध्यान, धीरभाव, तत, महाह्रद, कूजित, सनन्द, एकादशन्, पृतनाषह्, आदिदेव, निह्नव, सरुज्, निर्ममता, विवाहवेष, तनुत्यज्, पञ्चवर्षक, सर्वनाश, अनृजु, देव-गण, लोकविद्, अभिज्ञानशकुन्तल, निष्क्राम्य, जलशायिन्, दुर्विभाव, स्वार, जयैषिन्, पाणविक, प्रतिरोध, दुर्विषह, वेणुयव, ध्वस्मन्वन्त्, वक्व, घटकृत्, प्राणायम, बलयुक्त, व्यवस्थान, शौल्किक, प्रतीशीन, आनुपूर्व, हिरण्य, तिरोजनपद, यातर्, इति, प्राड्विवाक, शिल्पोपजीविन्, प्रदोषागम, सर्वजित्, त्रयोविंशति, महापाप, हंस, गिरिक्षित्, सुरभी, मृगण्यु, गतपार, धनद, पक्ष, निरधिष्ठान, निःसङ्गत्व, अनुमील्, स्मृति, परिष्कृत, आश्विन, धीर, आकरय्, अपर, खाद, हाल, निषूदक, ऊधन्, देवयु, प्रतिपुस्तक, दीर्घश्रुत्, सुखशय्या, षोडशांश, शात, मूर, विद्रुव, नियाम, परपुरुष, अनुप्रवद्, पिण्डपात्र, दश°, पूर्णेन्दुवदन, संकीर्तन, नित्ययुक्त, अनुग, देवाङ्गना, अनु°, ऋतुथा, चन्दनपङ्क, अपहति, सबाह्यान्तःकरण, उरंगम, सैन्धवखिल्य, निरपेक्ष, अवाचीन, सुनीति, सावधान, चोदक, तर्क, वप्तर्, भृष्टिमन्त्, निःसर्ज्, उपस्पर्श्, तविषीवन्त्, शिष्, त्रप्, कलाप, असमर्थ, क्षञ्ज्, मृगाक्षी, संनिहित, नवता, अगोह्य, सहस्रभर, सुहन, संबन्धिन्, त्रयस्त्रिंशत्, निर्भीक, ब्रह्मगुप्त, अनुव्याहर्, वार्द्धक, दुरुपदेश, ईषत्, स्थायिन्, स्नै, अर्भक, पद्मनाभ, वार, अघ्न्य, प्राणिमन्त्, शाव, पृथगालय, प्रयुज्, विद्युन्मन्त्, सोमवन्त्, प्रभिन्न, समनुगम्, संनिरोध, मनाक्, सुखोदर्क, कार्पण्य
сборка мебели, литовский словарь




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