तार्क्ष्य

तार्क्ष्य
तार्क्ष्य /tārkṣya/ m.
1) patron. см. गरुड ;
2) мифическое существо (конь или птица)




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°पच, परिवर्जनीय, कठोरता, °वद, प्रजानाथ, नगेश्वर, कल्पय्, वामनपुराण, संसारिन्, गार्द्ध्य, वचनोपन्यास, दुवस्यु, विश्रि, मंहयु, ऋहन्त्, एज्, भोजन, षट्चरण, चण्ड, उपोत्थ, समवस्रव, अर्थान्तर, परंपरा, शब्दपति, निःसंज्ञ, वह्नि, धर्मकोश, प्रजापालन, एकहायनी, वार्षिक्य, त्रिलोचन, ख्या, आरुह्, भूपति, त्व, दक्षिणाद्वार, अश्, टु, प्रतिबोधिन्, पाण्डर, सदन, प्रेक्षासमाज, आहार, एकल, मर्मवेदिन्, विहास, जातिमन्त्, बीजक, असु, आपातस्, अतिथि, कृष्णनेत्र, सहस्रभर, उच्छ्वासिन्, विज्जल, क्रिया, आचित्, प्रवत्वन्त्, दिवस्पृत्हिवी, होमवन्त्, दूरेअन्त, आशस्, शठता, परिष्यन्द, स्विद्, अभिवह्, मुनि, महादेव, पञ्चानन, उत्क्षेप, हस्तधारण, मुखर, नगराधिपति, सुखाय, संध्याभ्र, वचस्, पातञ्जल, मायामय, हुताशनवन्त्, वैहायस, वा, सिंहल, संतृप्ति, टङ्क्, प्रत्यङ्मुख, धार्मिकत्व, वकल, अस्त, हृदयप्रिय, बहुधा, कार्ष्णायसी, भूषाय, भुवनत्रय, संसृष्टि, दुराचार, स्थायिन्, निर्निद्रता, व्यपगम्, दोग्ध्री, निर्दिश्, स्तब्धीभाव, रत्नप्रभा, ग्रन्थिक, गणपति, संलुभ्, इन्द्रिय, अनावृत, प्रौढ, तपनी, गतप्राण, प्रतिसंवद्, अनुकम्पनीय, औशीनरी, आस्वाद्य, मूषिकशावक, सौरभ्य, तदा, जव, सत्कृति, श्वोवसिय, तुल्, आक्रम्, चीरिका, उषण, किण्व, नासाविवर, निवस्, कौसल्या, यौष्माक, अभिसंहित, आवह्, तिर्यग्ग, वेदवेदाङ्गविद्, अन्धस्, क्षता, मैत्रिन्, पर्यवसायिन्, प्रोक्त, नामधा, पटिका, दृढधन्वन्, सेन्द्रिय, ऊह्, प्रार्थ, धारिन्, निस्वपय्, मधूक, विपुलता, त्रैमासिक, ऋजु, समाविद्, पुष्पामोद, स्तनतट, निरानन्द, दैहिक, थंकारित, असाधु, संयम, शारि, अतिवर्ष, शेवल, उपजीव्, देवराज्य, जीर, वैयाकरण, हायि, निवर्तिका, कूज, प्रज्ञ, विश्पति, प्रावेशिक, स्वस्तिता, सूच्यग्र, चर्षणीधृति, वृन्दावन, पञ्चक, भुरण्यु, शिरोमणि, °जीविन्, स्वगुण, निशादर्शिन्, परिणाहवन्त्, रागवन्त्, मौढ्य, तोलन, षड्धा, संमान्य, आप्य, शष्पवन्त्, रोमण्वन्त्, शिम्ब, आदिकर्तर्, नगनिम्नगा, वर्षपात, ऋभु, छुच्छुन्दरि, दत्त, विविक्ति, सख्य, परिछिद्, प्रस्रव, वैदूर्य, पापात्मन्, व्रश्चन, परिप्रश्न, लोम°, परुष
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