मिह्

मिह्
मिह् I /mih/ (P. pr. /mehati/ — I; fut. /mekṣyati/; pf. /mimeha/; aor. /amikṣat/; pp. /mīḍha/; ger. /mīḍhvā/; inf. /medum/)
1) поливать, орошать
2) мочиться




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दुर्विगाह्य, , आज्ञापय्, प्रणिपतन, सानाथ्य, समवेक्षण, विकीर्ण, त्वग्दोषिन्, ऐकश्रुत्य, उदच्, आशास्, परिस्तर, अल्फियस्, गिरिधातु, नाकपाल, अपकारता, प्रयोक्तर्, प्रचल्, नैबिड्य, °नन्दनक, वाचय्, धिषणा, डांकृति, मुखास्वाद, भान्वक्षस्, अवध्य, द्विजादि, प्रज्ञा, अत्हा, सलक्षण, आप्ति, खगाधिप, समयाचार, एनस्, दैव, क्षीणत्व, व्यपेक्ष्, संसेवन, प्रपित्व, दस्म, बाहुल्य, अतन्द्रित, उपसद्, बहु, छिक्कार, अध्यात्मविद्या, शङ्क्, वरस्, शतजित्, जनित्वन, सव्यापार, शीलवन्त्, ब्रह्मा, वृता, धूमवन्त्, घुणाक्षर, रोपक, गुणसंयुक्त, प्रमातर, यकन्, यूका, अङ्गी कर्, आविल, पद्मसरस्, संपूर्णता, संदंश्, षष्ठांशवृत्ति, सारभाण्ड, नूत्न, तत्सख, संमिल्, क्षीज्, माया, बन्धुकृत्य, आलक्ष्, अभिहन्, ग्रामिन्, भृतबल, कर्पट, निधीश्वर, सोममद, सुमध्य, समुपदिश्, संशंस्, गिर्, शूना, विशिख, विजामातर्, अव्यभीचार, संस्तुत, आनन, नागिन्, प्रस्तारिन्, अनुष्टुभ्, पत्त्रिन्, सुतर, नयनवारि, पण्, °धार, यूयुवि, प्रच्यु, टङ्कण, विनाशय्, अभिशुच्, उपशी, परावसथशायिन्, प्रतिकूलिक, चौर्यक, भ्रंश्, दिवान्ध, निर्मूल, सहाध्यायिन्, षडश्व, संस्थान, व्युन्दन, प्रवालफल, अविशेषतस्, तैत्तिर, धावय्, नाद्य, अवर्तमान, त्रैमासिक, मासशस्, असमर्थ, पटिष्ठ, सेक, पयोराशि, केशव, ईदृश, हार, द्विशस्, शिवि, झंकार, जठर, अवन, व्याग्रचर्मन्, कुसुम्भ, क्षाम्, तमो°, अधि, उपपादय्, प्रवादिन्, विद्युल्लेखा, समधा, क्षत्तर्, भ्रम, संसाधन, पुण्यकर्मन्, प्रतिरुच्, चकोरव्रत, शाश, वेदव्यास, द्विसप्तति, अपरेद्युस्, भाषिका, उपस्निह्, स्वस्तिक, प्रचरण, वनराजी, ब्रह्मदत्त, देशय्, अमृतत्व, दुष्कृति, अरित्र, संपीड्, नाट्यवेद, विशेषिन्, निबिडय, लोकपति, अवभा, विज्ञापित, अलर्क, पटु, गोघ्न, रामायण, मेघदूत, सद्योजात, सांमनस्य, सौहृद्य, रजकी, भीति, राज्ञी, स्थानयोग, काच, दन्, महापाप, आह्वान, अभिविख्य, रैवत्य, सपत्नता, संघट्टन, अकर्मक, उच्चय, आस्तरण, कण, नियमन, विवह्, दत्त, प्रतिष्ठा, अर्थ, समानत्व, वपुष, दिक्करिन्, भुज्, नरपति, निरोध, प्रत्यवरोहिन्
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