मन्त्रण

मन्त्रण
मन्त्रण /mantraṇa/ n. совет; наставление




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अङ्गुलित्र, हितक, सिध्र, विस्रंसय्, माध्विक, संग्राम, हताश, सर्वदेव, सूप्य, परायत्त, लोलुप, पदवी, भृथ, दोधत्, निःस्व, देशक, ऊह्, पथिक, साधक, मण्डलीकृत, द्विपद्, समुदाय, अवयवरूपक, असित, स्थायुक, पाथो°, कच्छ, पुड्, समचित्त, अगम्य, पारमेष्ठ्य, अभिगम्, मुखव्यादान, आरुह्, द्रोहभाव, वि, रुज्, लेप, सरट, दिविचारिन्, पिञ्जर, उरा, द्वक, वधजीविन्, शम्ब, नर्तकी, अक्षीण, प्रत्यूह, शीरि, गृष्टि, सौकृत्य, महागुरु, हरस्विन्, हतक, सर्वप्रीय, प्रजन, अपोह, योगविभाग, च्यावन, लालस, सुधर्म, हेतुवादिन्, मधूच्छिष्ट, ब्राह्मणत्व, अमा, शरीरकर्तर्, घु, लस्तक, अशनाया, आलाप, पञ्चथ, स्वयंभु, रुवण्य, सर्वदर्शन, सेनाचर, मर्दन, वेध, वर्ध्मन्, निर्याच्, ओमन्, पञ्चमी, निर्बन्ध, संहस्, संवत्, नेष्ट, खञ्ज, साधुशब्द, रौक्ष्य, सुबोधन, वृषाकपि, ग्रन्थिक, नवनी, भङ्गा, शुचिष्मन्त्, क्षोभण, नदथु, दुर्धार्य, नागिन्, मनुज, द्रविणोविद्, न्याद, निष्प्रवाणि, ऊति, सुतेजित, अपहरण, पुण्यत्व, धृष्टकेतु, षट्, पूर्वदक्षिण, विघन, अवछद्, संमुच्, धार्मिकत्व, सहस्रवाज, वण्ठ, मूढचेतन, बलसेना, क्षेत्रिक, उपसेचनी, हण्डे, त्रिपुरहर, निकष, क्रन्द्, हिमा, संलुभ्, चन्द्रमय, मिष्ट, पर्याण, संपादन, धैर्यवन्त्, समुन्नम्, निधा, प्रचि, °निश, दिदिक्ष्, वैवश्य, रोमोद्गति, विष्वग्गमनवन्त्, निविद्, लेख, पारशव, निशा, अस्खलित, कुधी, वक्रनास, मद्वत्, दैवगति, पतंगम, शवधर, निवर्तक, सतत, पञ्चवार्षिक, षष्टिधा, राजमन्दिर, अन्तराय, प्रस्तव, तन्द्रयु, होत्र, मर्मविद्, शिल्पकारिका, सुरक्षित, गोशीर्ष, तस्यै, कूर्मावतार, वरारोह, तिस्रि, अतिरमणीय, पद्मिनी, दंसुपत्नी, मति, नैष्ठुर्य, स्यन्द, पादाहति, मध्यदिन, ध्यानिन्, निरोद्धर्, तप्ति, आराविन्, पत्तन, वालधान, याथातथ्य, प्रद्वार, कूर्दन, वृन्तिका, सैरावन्त्, विशालाक्ष, वृक्षच्छाय, दुःशला, °रोधिन्, दयालु, सजित्वन्, वेणा, भैक्षचरण, ऐकपदिक, अधिगा, पुरीतत्, प्रपद्, निर्णाम, शिरोदामन्, अत्रा, त्रस्तनयन, सकलविद्यामय, प्रक्षल्, विधुरत्व, हृदयेश, अयस्मय, प्रसृत
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