उपद्रु

उपद्रु
उपद्रु /upadru/ (формы см. द्रु I )
1) спешить, торопиться
2) кидаться, бросаться на (Acc. )




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अनाख्येय, सांपरायिक, पतन्त्, संदर्श, प्रतिस्पर्धिन्, हाहाकृत, दण्ड्य, सुरङ्ग, दृशति, कपिञ्जल, निदाघ, अबला, रूपकार, समानी, समुपयुज्, घृतवन्त्, हरस्विन्, एकान्वय, पिच्छल, वशगत, ऊर्णम्रद, मुक्तामय, देवतात्, परकृत्य, तृप्तिकर, द्रविणोदा, ब्रह्ममीमांसा, संक्षेपक, ययि, शोभिका, नटक, गद्, सृम्भ्, क्षयिष्णु, उपसेचनी, नदीमातृक, लोभनिय, मुनिवेष, विश्वदृष्ट, वारिराशि, यकार, षोडश, पट्ट, विमुक्त, बोधमय, उत्सर्प्, समुद्रार्त्ह, प्रतिनव, निर्व्याजता, प्राप्, स्वाद्वी, द्विस्, निखन्, विवक्षु, महाशब्द, शिलामय, अक्ष्, प्रोल्लिख्, भुजयष्टि, खट्, द्वैगुण्य, माधव, मानिन्, वाग्देवता, वृन्दैस्, गूढार्थ, अच्छ, रामणीयक, सर्वहुत्, पारद, त्रिदशारि, जा, सुग, प्रतिरुध्, फणभृत्, बृहन्मध्य, अवतर्, जयन्ती, अकाण्ड, भविष्यन्त्, पुरुष्य, दुर्मनस्ता, कोष्ण, वेणुमय, वैदेशिक, सत्कर्तर्, अषाढ, प्रमीतपतिका, अर्णव, मनुष, क्षारलवण, आस्वाद्य, समूह्, पुराविद्, शष्कुली, निष्ठावन्त्, अज, कुशेशय, अतिभू, विघातन, संमार्ग, सजन, निगडन, रवि, विद्वेष्य, प्रातर्जप, संप्रवृत्त, यावन्त्, प्रत्याधान, परेत, क्लीबत्व, पड्बीश, भूर्यक्ष, लोट्, वैकार्य, त्वच, सारता, चरितार्थ, ससंरम्भ, दशशत, संकर्त्, समाप्तिक, , दारवीय, , उप्सम्हर्, सप्रणामम्, अनुपम, व्यन्तर, अस्थान, विषाण, वेदान्त, सहधर्मचरण, देशीनाममाला, आधि-पत्य, परिव्रज्, उपरि, सत्यधर्म, वारणावत, निमील, राजभाव, निष्पुरुष, पुरुधा, हेलावन्त्, महाहव, मानना, धर्मवन्त्, आप्लव, अध्यवसायिन्, उच्चसंश्रय, त्रिंशत्, गन्तर्, प्रस्तब्ध, ज्योत्स्नी, नलिनीपत्त्र, होत्रा, उपधि, सप्तविध, वामा, भर्तृव्रता, साधनत्व, महासती, अग्रिय, पौत्र, पश्च, समुल्लस्, अनिच्छन्त्, श्रुष्टिमन्त्, ब्रह्मप्रिय, स्फिट्, विकिरण, अनुग, असंभव, अशनानशन, परिणद्ध, स्तोक्य, प्राग्लज्ज, अनु, काण्डीर, अभिवाद, भैक्षचरण, कुट्टनी, रत्नमाला, अवनि, साश्रु, देवतार्चन, स्वाशु, संचयन, वरोरु, संकर्, अन्तर्वंशिक, विश्वस्त, स्थूललक्ष, वित्तकाम्या, रौक्ष्य, रैवत्य, दंशन, वशगमन, नैमित्तिक, अप्रसन्न, खच्, कामपूर, कुविन्द, विजित्वर, त्रयःपञ्चाशत्, श्वोवस्यस, जलजीविन्




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