स्रंस्

स्रंस्
स्रंस् /sraṅs/ (A. pr. /sransate/— I; fut. /sraṅ-siṣyate/; pf. /sansrase/; aor. /asrasat/; pp. /sra-sta/)
1) падать
2) идти
3) тонуть




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नवेदस्, सर्वहुत, अनुपयुक्त, मज्मन, अवमर्द्, स्वर्गमन, अभिकाङ्क्षा, सितासित, स्वसृ, स्वपन, रथमुख, पुत्रपौत्र, कन्यात्व, द्वैतवाद, संलक्ष्, अनिमिष, ऋज्वी, वैदूर्य, अक्रोध, श्राय, चुक्र, कर्कोटक, वर्षपात, साशङ्क, अर्क, शब्द्, द्वादश, त्रिवत्स, सिट्, कलकल, मनाक्, आदिश्, रम्भ्, नववधू, विगल्, मृक्ष्, संवल्ग्, समद, कण्टकशोधन, दक्षिणपूर्वा, अनुरोध, झणत्कार, सेव्, रुषा, घुण, शल्क, कल्, परिया, प्राणधारण, प्रतिहर्तर्, प्रवर्तन, धावन, कोरक, मुखपङ्कज, दान, ते, एकरिक्थिन्, मन्त्राराधन, अत्यय, आसिच्, यावत्कालम्, श्रोणिमन्त्, कृष्णायस, सृक, विन्द, चित्रवर्तिका, प्राबल्य, विजिति, वार, जलज, सवितर्, कृच्छ्रता, जाति, प्रतमाम्, कन्, संस्तर, स्नु, °प्रवेशिन्, परिवन्द्, सिंहद्वार, साचि, सरथ, चौर्य, उस्र, अभिहर्षय्, हैम, दाह्य, शवस्, गाहन, अनुरुद्, , तक्, अरोग, महीनाथ, गर्भिणी, निघ्न, प्रद्वार, पौण्डरीक, व्रीडित, वान्ति, नृषद्वर, पस्त्य, दृष्टदोष, चमस, भासस्, द्वारिन्, ध्वज, संली, सर्वकाल°, विकास, धर्माश्रित, कृधु, संघट्टन, कमलनेत्र, अतिवृद्धि, नाकलोक, असकृत्, शतक, अन्तरिन्द्रिय, फणि, भर्तृव्रत, प्रलुभ्, तनुभाव, तर्जना, नैसर्गिक, पुरोग, महाकपि, प्रणीति, दुष्टात्मन्, तरुण, लघीयंस्, °पत्नीक, अभिधानकोश, नदीन, महिमय, अपेक्ष्, तविषीमन्त्, परिशङ्क्, शिवसूत्र, परम, अतिशयन, विवध, मङ्गल, निर्वाक्य, प्रियजन, तनुत्यज्, इषुमन्त्, जीवनहेतु, विभूतिमन्त्, वासवाशा, परिशङ्कनीय, प्रतिमार्ग, घ्रेय, चुच्चू, दशसाहस्र, ताम्रचूड, ध्यानतत्पुर, उपलम्भ, अभिसंधि, द्विजादि, यावदन्ताय, दौःस्थ्य, शिरोरुजा, आच्, असांप्रत, प्रक्रान्त, उज्ज्वल्, सुष्ठु, वस्तव्यता, उपमेयोपमा, त्रिवर्ष, सप्तविंश, संहर्ष्, भट्टारकवार, अजितेन्द्रिय, विजृम्भन, प्रतिरुच्, वयस्यक, दशरथ, स्तवथ, खग, परिव्राज्, अवग्रभ्, दंष्टर्, दाश, शिक्वन्, दिविचर, नस्तस्, शब्दापय्, गिरिपृष्ठ, उत्तमतेजस्, असुर्य, नरेन्द्र, अनवरत, लिट्, डांकृति, निवर्तनीय, नालिकेर, उपशी, ऋक्षराज, अवगाह, कर्ष्, द्विशिख, श्रत्रिय, प्रातर्, तुर्वणि, कूलंकष
сборка мебели, литовский словарь




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