भैक्षचर्य

भैक्षचर्य
भैक्षचर्य /bhaikṣa-carya/ n. см. भैक्ष 2




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उपसेचन, उपस्तम्भ, आभास, °मुच्, संध्याकाल, छिद्, पृथिवीपरिपालक, प्रायाणिक, व्युपरम, रेष्, संवा, भास्वन्त्, इष, सुदृशी, रोचक, प्रतिपथ°, सुपुष्पित, त्वयि, शमि, मन्दर, सत्यभामा, गृहु, सर्वदा, उशीरबीज, सनेमि, घृत्य, अष्टाशीति, जप्, निष्पू, सीताद्रव्या, लतामण्डप, निष्पन्द, संग्रहीतर्, सीमन्तोन्नयन, द्विमूर्धन्, समुद्धत, कुशूल, वचनोपन्यास, अनभ्र, बंहीयस्, सुषुत, आचार्यत्व, आकाशवर्त्मन्, विनिद्र, अनास्था, वैमात्रक, सोममद, वेणुयव, नाभ्, कथक, धूपाय, लोकानुग्रह, तण्डुल, जयद, च्यवान, यथार्थनामन्, त्रिककुद्, निर्विकल्प, परपुष्ट, सृणी, रत्नमय, सुखाभ्युदयिक, ग्रामीण, ईर्म, नृति, निगूहक, संत्यज्, हस्तिघात, राजी, व्यपनुद्, स्तनयित्नु, °वेशिन्, राजभट, भूशय, चित्रगुप्त, दाक्षिण्यवन्त्, दृष्टिपात, प्रपितामह, सत्यमय, प्रणयवन्त्, कलह, आदित्य, समनुज्ञा, समाख्या, सुहन, हाल, धूमपान, ज्ञप्ति, पुरस्तात्, गणपाठ, संस्कृति, विकृत, अङ्क्ते, विरक्ति, संपठ्, रिक्थ, पाण्दुलोह, दुर्गता, हाहाकृत, मण्डल, पौगण्ड, लप्सुदिन्, द्विविधा, लुभ्, सुरी, तालव्य, अपवर्ज्, त्रिकालदर्शिन्, शुल्क, सखी, विप्रवास, आराधय्, निरङ्कुशत्व, धर्तर्, अरण्यौकस्, यूनी, शरावर, दीपमाला, सुखिन्, दृषत्कण, स्वयुक्तितस्, स्फुट्, प्रसन्नजल, उद्रिन्, कीलित, चान्द्रायण, कषण, लोकयात्रा, स्वधर्म, आलवाल, क्रोष्टर्, प्राधीत, बन्दिग्रह, नविष्ठ, भानव, सज्य, कर्मन्, दुर्जन, दोषातन, अत्रि, पीत, अभग, नर्क, कुमारिल, परिवेत्तर्, विशेष, अम्लान, अवपश्, , श्रौत्र, नस्त, त्रिलोक, म्रक्ष्, हिमश्रथ, देहवृत्ति, पठ्, ऋतावन्, अहोरात्र, आवसति, ऊर्जस्वल, महात्याग, पराभूति, त्रस्तनयन, स्वर्, शिक्ष्, स्वक्ष, पदरचना, आभिजात्य, सितातपवारण, असहन, अपथ्य, सेन्य, दशनच्छद, दधिमण्ड, योद्धर्, उत्तर्, सुभट, मञ्जरी, परिक्रम्, शिवताति, अवहस्, कस्तूरी, एव, दुरवाप, संप्लव, धिषण, प्रसूति, तुवि°, विघातिन्, सांयुग, महित्वन, दधृष्, घृतवन्त्, दुर्मनस्कत्व, उत्पन्न, भिक्षार्थिन्, अवरज, हास, स्नात्व, उदयन, तुरंग, घर्मच्छेद, जगतीपति, माक्षिक, दौहृद, समादा, दारण
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