ग्रन्थय्

ग्रन्थय्
ग्रन्थय् /granthay/ (caus. от ग्रन्थ् )
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2) составлять




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ध्वजिन्, उपताप, अध्यज्, शिशिर, व्रत, वाजसात, हठ्, संक्लिन्न, वर्मन्, सालंकार, दिविगत, तरस्विन्, प्रमथन, पक्षधर, प्रशर्ध, हायि, देवितर्, खरांशु, समस्, पूर्णत्व, दानवीर, दोग्ध्री, वासन्तिक, शक्रायुध, संशम, स्वान्त, विहर्, वराङ्ग, प्रमोदन, चर, चिकीर्षु, प्रसू, अगृह्य, नी, इच्छु, तद्भागिन्, गृहवास, प्रत्यायना, विघट्ट्, अपचिति, संकट, दिवानिद्रा, ब्रह्मवर्चस, विसार, प्रव्राजिका, वार्क्ष, संयत्, आर्षभ, अनुकरण, अभिधानचिन्तामणिनाममाला, नौचर, काटव, रामणीयक, पोतास, उञ्छ्, तोमर, सुशेवस्, द्यूतकर, देवीगृह, हेलन, आवर्त्, लिप्ति, हे, बलसेना, मनोभव, ससुहृद्, लोककण्टक, शनि, चण्डरश्मि, संदा, संवप्, वृक्त, व्यथन, कृत, व्यापाद, विजि, लोहायस, हेतुक, भ्रेष, मृगयु, वायसी, शुष्, विनाश, करणीय, गणेश, परिपश्, न्युभ्, सुमधुर, काञ्चनीय, गोपेश, पीडा, परिख्या, ब्राह्म, हेमकर, वेपन, पूजा, आग्नेय, अवतार, आर्ष, उपनिश्रि, तर्जना, अहोरात्र, कौणप, मदिका, अवितथ, सर्ज्, नासिक्य, प्रदोषागम, दृष्तपूर्व, जानकी, प्राच्य, वेहत्, देहवन्त्, विभ्रम, शिरोमणि, निश्, अङ्गुरीयक, अदय, मन्दन, नवरस, साध्, भैक्षाहार, क्षुधालु, धृष्णु, हृदयप्रमाथिन्, पेशस्कारिन्, पृशनी, परिलुड्, सुशीतल, यतम, वसुद, मैत्री, द्रा, अभ्यस्त, विलज्ज, मधुपा, दोषिन्, वररुचि, छद्, गुर्, किञ्चन्य, नापित, संयास, शृङ्गवन्त्, करङ्क, अपदेश, प्राणाधिक, दिशां, संमत, ख्यापन, अर्थितव्य, दिविक्षित्, विचृत्, कण्ठग्रह, शोखर, °शाय, अगद, छान्दस, पाशहस्त, सुभट, दीधिति, संजन्, संवृत्, उत्पन्नबुद्धि, उद्घोषण, देवयजन, नकिंचन, अपबध्, प्रिय, विरोचय्, ऋजीयंस्, अनाधृष्ट, अब्द, हिमालय, धापय्, आर, पूर्वजाति, स्फुल्, प्रभास्वन्त्, सर्वतो°, मर्मर, स्थण्डिल, वृकति, तेजीयंस्, विरक्त, संनियोग, राजपुत्र, प्रदर्शय्, माध्याह्निक, परम, यम्, क्षामि, विफलत्व, आव्रज्, छगल, पञ्चार, प्रच्छादन, नकार, क्ष्मा, महिमन्, पादात, समानाधिकरण, स्थल, फलग्रहि, गवेष्, श्वि, प्रादुष्करण
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