ध्या

ध्या
ध्या I /dhyā/ (Р. pr. /dhyāyati/ — I; fut. /dhyāsyati/; pf. /dadhyau/; aor. /adhyāsīt/; p. /dhyāyate/; pp. /dhyāta/; ger. /dhyātvā/; inf. /dhyātum/)
1) думать
2) представлять (себе)
3) помнить
4) обдумывать




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वर्णमात्र, बन्धकी, अन्त, विक्षोभ, तिलपर्ण, श्रान्ति, निगुत्, गर्भग्रह, आशौच, तापिन्, देवदारु, नार, औत्क्य, मर्मज्ञ, मुद्, संशय, संवह, विषमवृत्त, सिंही, मुष्टिहन्, वाजदा, आचार्यता, शरीरत्याग, हंसबीज, संभ्रान्ति, गुण, संशितव्रत, फुत्कार, वहिष्ठ, विनता, एकान्वय, कपालमालिन्, मुद्रिका, जा, जम्बुद्वीप, रथचरण, भान, विक्री, शास्त्रिन्, अतिप्रसक्ति, अलक, रजनिकर, दुःसाध्य, शुभंयावन्त्, स्वपन, अमन्द, वेश्मान्त, धर्णि, मह्, देवसद्मन्, प्रयुत, मुखचपला, लेपिन्, चिबुक, ऋभु, असूया, नारकिक, हंसाय, अभिनर्द्, °पा, निषेवण, दिदृक्षु, लक्षय, नास्, दूषण, मघ, आकार, जेय, अनुदर्श्, आदितेय, त्रिषत्य, जलभाजन, विषजिह्व, डांकृति, शव, अरिष्टताति, भृतबल, अतिक्रमण, दुर्निग्रह, संमातर्, विवृद्ध, परिहि, विवध, परावर्त्, शामूल, ऊर्ध्वपुण्ड्र, उर्वशी, दुर्दिवस, प्रथमा, क्षयण, अभिबाध्, सन्त्, तिर्यक्, पड्बीश, शुभाय, अचित्त, उद्गीथ, मौलिमाला, वामनत्व, शोचि, व्यचस्, मृचय, सूद, निर्दुःख, ऊर्ध्व, सासुसू, श्वितीचि, यजिन्, श्मश्रुण, चतुष्क, निविद्, धर्मसेवन, भावित्व, धूसरित, प्रतिक्षेप, अभिमील्, कष्ट, सुखित, अत्रभवन्त्, परिभूष्, वीणा, अभ्युत्था, वेगोदग्र, अनुशास्ति, सत्कार, उपावर्त्, दानपरता, भिक्षाचर्य, गूढ, उपभङ्ग, कृत्वन्, पुरमार्ग, वसुविद्, अभिसंस्वर्, नामथा, युगान्त, धारानिपात, नवक, रम्, वसुत्वन, प्रवेशक, निर्, जलदक्षय, मदनावस्थ, नव, अपहा, प्रवह्, अपभू, संलोक्, उच्छृङ्खल, सुधन, कामचरण, रजत, आनद्ध, सोत्कण्ठ, आतिथ्य, कर्का, पुरावृत्त, यमसादन, अध्यागम्, उपदेश, संकर्ष्, चीत्कार, श्रवस्यु, मित्रद्रुह्, पुरुषसिंःअ, भृमि, तण्डुल, काठक, संवेग, तेजन, पृक्ष, त्रैकालिक, पृषत, परिलिप्, यन्तर्, गोलक, दौष्ठ्य, वसुंधर, , युक्तितस्, साटोप, शाकवाट, नन्द्, दस्म, अनुग, भाति, अटवी, सिद्धभूमि, विहस्त, संयम, श्रावण, तप, धनकोश, सोत्सेध, इन्द्रप्रस्थ, मख, तरस्विन्, महाविक्रम, आविष्करण, श्येन, प्रेषण, साग्र, सुमहातेजस्, निभा, आजनय्, एतावन्त्




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