लोकप्रवाद

लोकप्रवाद
लोकप्रवाद /loka-pravāda/ m.
1) пословица
2) оборот речи




Случайная выборка слов

हवीमन्, आत्मजा, धरणी, ज्ञाति, रणभूमि, भुजंगम, शाश्वत, शतपति, °शरीरक, धृष्टद्युम्न, हेलिक, श्रुतसेन, हुताशन, उद्धत, दण्डधारिन्, रयि, , संवेष्ट्, क्षोभ, उपनिबन्धन, माघ, तामरसी, पाङ्क्त, निराधि, समुद्रव्यवहारिन्, अग्र्य, शाब्दिक, पीलु, ऊर्णनाभ, विगलित, प्रसववेदना, अमृतत्व, आप्तकारिन्, द्रापि, निर्णिज्, अभिवच्, दक्षिणा, निशाकर, ह्यस्तनी, प्रास्ताविक, वासतेय, आत्मवध्या, गर्भगत, द्वीपिन्, नाद, नरिष्टा, पुल्कस, दोःशालिन्, अभिव्यक्ति, परिष्कर्, ससंशय, ऊर्ध्वबृहती, प्रियवचन, त्रयीमय, वाक्संयम, फलत्व, वीरुध, पौरजानपद, सु, नारिकेर, साधुभाव, बास्तिक, सपर्यु, अदाभ्य, परिलधुता, नट, पूर्णता, बाह्यतस्, चतुःशत, एध्, मन्दसान, दक्षिणायन, कर्मण्य, संशम्, निविद्, दिग्गज, सत्त्वशब्द, दुश्चित्, हर्षण, नाव°, यौगपद्य, दण्ड, हिमरुचि, गोघ्न, विश्व, आति, पाजस्, स्नानीय, भक्षण, किङ्किर, सव्यापार, जयघोष, गोपुच्छ, त्वरित, बृहस्पति, क्रुध्, त्रैकाल्यदर्शिन्, दुःष्वप्न्य, शरभ, सर्ब्, सुत्रात्र, पुण्यजन, अभूति, रजस्वल, दीर्घश्रुत्, जरस्, अप्राधान्य, बन्ध्, बहुवर्ण, संचर, वपुष्य, पञ्चवार्षिक, गायत्री, स्वस्रीय, संकूज्, पार्थिवता, पूतिनासिक, कुटीर, अदण्ड्य, लोप्त्र, लूता, सूद्, अनुदिनम्, निरालोक, दिवसकृत्, पैच्छिल्य, पुनर्युध, निशामणि, स्वसर्, पृथिवीदण्डपाल, कुरङ्गलोचना, आर्यवृत्त, तनुत्याग, अग्नायी, ऐषीक, नयशालिन्, वर्जन, प्रतिप्रज्ञाति, अर्हन्त्, अरे, विगीति, कान्ति, लुठ्, वसिष्ठ, वृत्रहन्, कुलपति, किरक, शुच्, शौर्य-कर्मन्, देहली, व्यालम्ब, व्यालम्बिन्, विवास, व्यावहारिक, द्रुहु, अभिनी, वेद्या, हेरम्ब, स्थानक, परिवृत, अव्याज, सजन्य, अपवाद, प्रवादिन्, पूर्वोक्त, सहाय, प्रस्तुत, संरुह्, रावण, झर्झरी, बभस, सम्यक्त्व, पोत्रिन्, समुपोह, प्रजन, सक्म्य, गु, त्वादत्त, चमत्कृति, भवसागर, कुन्ताप, एणीद्र्_श्, उपगान, एकस्थ, कन्यादान, संवृद्धि, जिज्ञासन, युद्धभू, भरित, जलार्द्र, तूपर, द्वारपति, वृक्षौकस्, स्थाप्य, मृगारी, पारत्रिक, पिश्, परिनिष्ठित, बृहत्त्व, सान्द्रस्पर्श, लुङ्, धनसनि, समरण, नैगम, द्रष्टर्, अनाग, ला, वहिन्
сборка мебели, литовский словарь




    Яндекс.Метрика
    словарь санскрита 2009-2012 ©LingvoKit