गूढार्थ

गूढार्थ
गूढार्थ /gūḍhārtha/ (/gūḍha + artha/)
1. m. скрытый смысл
2. bah. содержащий скрытый смысл




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सुदावन्, , विद्योत, विशस्त्र, व्यान, गुह्यक, अवजि, पुथ्, सदम्, परिगणना, पचेलिम, बहुप्रज, अन्तकरण, सानुक, °दन्तक, वक्रोक्ति, धीवन्, नितोशन, श्रोतर्, ऋतजा, वालुकामय, परीणाह, सशङ्क, पार्श्व, जर्जरत्व, धनुर्मध्य, चिता, मनसिज, अनुपलम्भ, तद्, रजस्वल, पारसी, मत्तमयूर, विरूपाक्ष, वृषत्वन, नामशेष, उज्ज्वल, दक्षुस्, रातहविस्, अवगुह्, प्रियभोज्न, व्रज्या, दिवंगम, सुनासिक, नौकादण्ड, श्वसथ, द्रवता, ननान्दर्, दैहिक, आयुध, तम्, शिच्, साग्र, चक्षु, निश्चिन्त, अप्रतिबुद्ध, विभर्, अम्बष्ठ, अभिख्या, प्ररोचन, स्त्रैण, चारथ, आसन, प्रगेतन, विजृम्भन, धृतद्वैधीभाव, पारीणह्य, हरिमन्त्, त्रिजत, सुम्न, अक्ष्, पुनःपाक, राजाधीन, पीडा, पोत, दम्भ, विसर्प्, द्विष्, लोकपाल, आभज्, चम्पका, तन्द्रा, इमान्, प्रगुणय, गिरिपति, संश्रि, अभिनश्, उपगान, च्यौत्न, पादचारिन्, शतमूर्धन्, हिमवारि, दुःकृत, वेट्कार, अश्विन्, वप्सस्, प्रोन्मील्, तरंगिणी, धर्मचारिणी, मर्य, आरभ्, मैथिली, ऋक्संहिता, उपयुज्, साम्य, द्विज, कारण, हस्तिकर्ण, अणिकर्तर्, अभिचक्ष्, विश्, हलायुध, नाट्य, द्विषष्टि, दूरसंस्थ, संस्मि, तुषारकण, आस्फालन, त्रिभुवनेश्वर, अवस्थान, अनुसरण, मधुकर, चाल, द्व्यर्ध, विभय, अनुकरण, उख्य, अदेशकाल, लग्न, विप्रदुह्, अभिगमन, नामतस्, यजत, द्वरिन्, परिसाध्य्, नदीनद, तरुणी, दर्शनपथ, महाराज, पञ्चजन, परिवर्तनीय, गीतवादन, संपूजन, पश्च, अष्टभाग, घकार, चैत्यवृक्ष, समाह्वय, वृन्दावन, सुशिष्य, स्थापनीय, सागरक, सागर, उपरोध, शाव, पीतुदारु, नहुष्य, हिमश्रथ, नियोजन, चान्द्रमस, अवहित, ध्रुवगति, °शाय, कर्त्र, उदकुम्भ, असंप्राप्त, नरत्व, दुर्जल, कृतमति, जिह्मशी, कर्णिकार, हृदयप्रिय, नृति, अदान, नरपति, घोषणा, सेन्द्रिय, नाटिका, विमलय, °व्याप्, अस्माद्, शून्यी कर्, पञ्जी, सुश्री, प्रतिरोध, सारिक, शुश्रूषण, विद्यावन्त्, पटच्चर, त्रिविक्रम, चञ्चललोचन, एकराज, तुर, निरीक्ष्, विहति, प्रतिरक्ष्, तिर्यग्जन, नाभिलक्षित, ध्वंस, साख्य, जलशय्या, वाक्पथ, तन्द्र, तितिक्षु, हीनरोमन्, विकेश, अक्षेत्रिन्




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