विमोक्तर्

विमोक्तर्
विमोक्तर् /vimoktar/ m. nom. ag.
1) тот, кто распрягает
2) освободитель




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वसन्तबन्धु, हेतुक, °लोभिन्, षष्ठ, अमा, सकण्टक, सूक्तवाक, चैत्यतरु, निष्पद्, प्रजल्पित, मत्स्यण्डिका, , प्राड्विवाक, सह्, महीनाथ, अवजि, दमूनस्, स्त्रीविषय, हेट्, अभिज्ञान, कील्, श्रुतपूर्व, प्रोदक, हरिदास, अध्यात्मरामायंअ, नर्, परिधारण, केवट, ठकार, कृशत्व, तात्पर्य, वह्नि, वरेण्य, ग्रन्थिक, अण्ड, अयास्, वप्र, अनभिलुलित, नरव्याघ्र, नरराज, समशील, सेनाचर, सदसस्पति, गोव्रज, दुर्विषह, दुर्जल, सकल, भूपतित, पुष्पफल, मत्सर, सभागत, व्यावहारिक, धूर्ति, शिरःकम्प, पेडा, प्रशुभ्, नासिकाग्र, मन्दु, क्षुभ्, निव्यध्, पनु, प्रविलोक्, अकिंचन, मृत्पिण्ड, वास्तव, स्वपन, लाट, अतिगाह्, सार्थवाह, तदन्त, जलद, पक्तर्, कठिनता, वाश्रा, शरद्, हिमाचल, बुध्न, हिंसा, मञ्जु, धनार्त्हिन्, वणिक्सुत, इन्द्रिय, निष्ठीवन, प्राचैस्, सुमध्यम, अभिमथ्, अम्बा, सर्वविद्य, मुण्डिन्, अभिलष्, बीभत्सु, रजोमेघ, गुङ्गु, दाशराज्ञ, आदिदेव, पाप, सप्तकृत्वम्, त्वक्त्र, अधिचि, पूर्वान्त, पङ्गुक, छत्त्रधार, लोमहर्षण, त्रिविक्रम, अलज्ज, पितृदेवता, °ह, रत, परिषेक, खल्व, लोकिन्, मरुत्वन्त्, नास्, विबन्धु, प्रियबन्धु, गविष्ठ, हृदयसंनिहिता, भूरिस्थात्र, रक्षपाल, पुण्याह, त्रिदशालय, शकुनि, परिस्पन्द, परिवेदक, सगण, शतधा, मन्त्राधिराज, पञ्चधातु, मौक्तिक, शकटिन्, शतनीथ, सूदयित्न, मार्जारक, अध्वन्य, कर्षण, सहकार, सेलग, त्वत्°, मस्तुलुङ्ग, , ध्वजपट, संसेव्, प्रहाणि, राकाचन्द्र, स्मेर, कुवलयदृश्, ऋते, गणक, उषासानक्त, हुडु, चिन्ता, विस्र, अन्वय, प्लवित, क्षुद्रजन्तु, कौटुम्ब, आदीप्, संज्ञक, विस्मापक, दधृष्, सुबीज, उचथ, करीर, प्रपद्, निभालन, सनीयंस्, वृन्दिष्ठ, परिलिख्, दूरग, घृत्य, अयुत, क्षैत्र, अग्रमुख, संलपन, अन्नपति, वाजदा, स्नु, कर, गोपालिका, आत्मस्तव, ऋणवन्त्, नेदीयस्, सुसीम, अपसार, विद्युत्वन्त्, भी, जयघोषण, स्नानीयवास्त्र, मृणाल, बट्, निर्ग्रह, भ्रातृदत्त, विवसन, व्यवहित, त्रिसंध्य, भस्, अयशस्, असत्, शक्र, अनन्विष्यन्त्, द्रुह्, बृहदुक्थ, सोतु, वर्तुल, विप्रकार, अनीति, षण्मासिक




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