जम्भकविद्या

जम्भकविद्या
जम्भकविद्या /jambhaka-vidyā/ f. наука о магии




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विश्वजू, तर्प्, पुरा, अवधू, स्पर्श्, हरस्विन्, अगोचर, तिग्मता, वम्, अवधि, परिपवन, शिञ्जा, मानयितर्, कुजीविका, शिलींध्र, वृत, अनुभू, धर्मिन्, निष्णात, क्षम्, निम्न, नमस्कार, नेमि, सर्वाङ्गीण, पूर्वपथ, सूनृता, टंकार, रावन्, ऐन्द्रजालिक, कुड्य, कुमारिका, प्रत्यधिकरणम्, तारकाराज, प्रायोक्त्र, शेषस्, भिक्षाचर्य, संदीपन, साचेय, उपपादक, द्रव्य, हन्मन्, समुद्रयात्रा, सग्रह, लगुडिन्, अजय्य, व्यासेध, निर्विकारवन्त्, सुखत्व, अवया, धर्मधृत्, अनड्वाही, कालज्ञ, कार्कश्य, दिष्ट, वैशद्य, सहभुज्, हिमाद्रि, हंसपदी, लवणजलनिधि, अभ्युन्नत, अविशङ्का, अविषाद, पुरूवसु, ईष्, द्वैरत्ह, सितमनस्, क्षैत्र, पिप्पल, प्रावार, जाघनी, संराज्, दर्शनविषय, कुभिक्षु, सीता, समावह्, प्रश्नोपनिषद्, पार्थिवत्व, प्रलापिन्, सर्वगत, प्रत्यपकार, जप्य, स्यन्द, त्र्यक्षन्, अजर्य, परिस्तर, गोपा, सावयव, व्यञ्जन, यावत्, व्यापादय्, प्रपथिन्, दत्तातङ्क, सारथि, त्रिसप्तति, अश्रद्धेय, सर्वस्व, नलकिनी, आव्रज्, यज्ञहुत्, ऊम, दण्डनायिन्, दुर्विभावन, रावित, क्षुल्लक, शालि, बालकेली, विलू, आबाधा, पोटी, त्रिदण्ड, °स्थ, पथ्य, इषु, अवपश्, अवलिप्, विंश, श्रेणि, सोमन्, विषुण, जूर्य, उपभर्, कृषी, °वर्ज, त्रिपक्ष, नशन, प्रादोष, स्नेहन, अतिशयन, शिरोग्रीव, चरणविक्षेप, लोम°, निर्वैर, ग्लस्, निष्पत्त्रक, दीर्घयशस्, कांशि, महापङ्क, युवश, पूतन, ऋच्, संपारिन्, प्रेक्षक, भिद्य, कर्हि, निस्रव, अत्यय, ब्रह्मोद्य, अर्हन्त्, प्रकाम, विज्वर, वेदव्यास, श्लाघ्, हरिवन्त्, भाणक, व्रीडा, रस, पुनर्भू, दन्तघाटक, त्रिरात्र, विग्रथ्, षाण्मासिक, संहि, युगपद्, पारुष्य, आकाशयान, अपरान्त, तीर्थकर, विविद्, अतिबाध्, संहिता, सक्रुध्, चतुश्चत्वारिंश, अनुक्त, प्रेष्, मातर्, शून्यता, दुरासद, आव्या, श्रम्, प्रमुदित, नगरस्थ, कामरूपिन्, दुष्टर, प्रतिरव, दिर्घजीविन्, एता, प्रजवन, पेट्टाल, लोहवन्त्, तृप्तिकर, ब्रह्मविद्, दार, साम्यता, शाक, अपभाषन, व्यावृत्त, विभञ्ज्, कलश, विभक्तर्, आश्रय, विप्रतिपत्ति, संभाष्, साची कर्, चुण्टी, शास्, वनैकदेश, °मूर्ध
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